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क्या कहता है UGC का नियम?
यूजीसी ने साल 2022 में एक ऐतिहासिक फैसला लिया था, जिसमें एक साथ दो डिग्री करने के नियम को मान्यता दे दी गई थी। इस फैसले के बाद छात्र एक साथ दो बीए, बीएससी, एमए या डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं। लेकिन इस नियम को लागू करते हुए यूजीसी ने कुछ शर्ते भी रखी थी, जिसके बारे में हर उस छात्र को जानना जरूरी है, जो एक साथ दो डिग्री करने की इच्छा रखते हैं।
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क्या पीएचडी पर लागू है 'डबल डिग्री' का नियम
भले ही यूजीसी ने डबल डिग्री के नियम को लागू किया हो, लेकिन यह नियम केवल बीए और एमए कोर्स तक सीमित है। बता दें कि यह नियम पीएचडी (PhD) छात्रों पर लागू नहीं होता है। जी हां, दो विषयों में पीएचडी नहीं की जा सकती।
एक साथ दो PhD क्यों नहीं की जा सकती?
यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार बात करें तो, छात्र एक साथ दो अलग-अलग विषयों में पीएचडी नहीं कर सकते हैं। यदि कोई छात्र ऐसा करने का प्रयास करता है, तो उसकी डिग्री पूरी तरह अवैध घोषित कर रद्द की जा सकती है। इसकी वजह है कि पीएचजी को सामान्य थ्योरी कोर्स नहीं है। यह एक रिसर्च प्रोग्राम है, जिसमें छात्रों को रिसर्च, थीसिस लिखने, फील्ड वर्क और लैब एक्सपेरिमेंट देना होता है। ऐसे में दो अलग विषयों में एक साथ रिसर्च करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। इतना ही नहीं, इसमें अटेंडेंस और रेजीडेंसी नियम भी है।
हम सभी जानते हैं कि पीएचडी के शुरुआती 6 महीने का कोर्स वर्क अनिवार्य होता है, जिसमें उम्मीदवार का उपस्थित होना अनिवार्य है, ऐसे में एक साथ दो स्थानों पर उपस्थित होना मुश्किल है। एक अन्य नियम के अनुसार, पीएचडी के लिए आपको एक रिसर्च गाइड यानी सुपरवाइजर के तहत काम करना होता है। कोई भी विश्वविद्यालय या गाइड आपको किसी अन्य जगह नामांकित रहते हुए शोध की अनुमति नहीं देता।
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दो विषयों में PhD करने का सही तरीका क्या है?
यदि आप दो अलग-अलग विषयों में डॉक्टरेट की उपाधि चाहते हैं, तो इसे करने का सही तरीका है कि आप पहले एक विषयों में पीएचडी की शिक्षा प्राप्त करें। उसके बाद नेट या अन्य पीएचडी परीक्षा में शामिल होकर दूसरे विषय में पीएचडी करें।
