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2000 रुपये से ज्यादा की UPI पेमेंट पर MDR लगाने का विरोध, CTI बोली- कैश की ओर लौट सकते हैं ग्राहक

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि 2000 रुपये से ज्यादा की UPI पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लगना चाहिए। उनका कहना है कि भले ही MDR दुकानदार से लिया जाए, लेकिन इसका असर आखिरकार ग्राहक पर ही पड़ सकता है।

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यूपीआई

2000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाए जाने की चर्चा के बीच व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इसका विरोध किया है। CTI का कहना है कि UPI पर किसी भी तरह का शुल्क लगाने से व्यापारियों और ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और लोग दोबारा नकद भुगतान की ओर जा सकते हैं।

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि 2000 रुपये से ज्यादा की UPI पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लगना चाहिए। उनका कहना है कि भले ही MDR दुकानदार से लिया जाए, लेकिन इसका असर आखिरकार ग्राहक पर ही पड़ सकता है।

'2000 के सामान पर 20 रुपये का अतिरिक्त बोझ'

बृजेश गोयल ने कहा कि अगर 2000 रुपये के ट्रांजैक्शन पर 1 फीसदी MDR लगाया जाता है तो व्यापारी को 20 रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। ऐसे में दुकानदार या तो ग्राहक से नकद भुगतान के लिए कह सकता है या फिर इस खर्च को सामान की कीमत में जोड़ सकता है। CTI का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे कारोबारियों के बीच UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. संगठन को आशंका है कि MDR लागू होने पर कुछ व्यापारी बड़े ट्रांजैक्शन के लिए कैश भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं।

दिल्ली के बाजारों में 90% पेमेंट UPI से होने का दावा

CTI ने दावा किया है कि दिल्ली के सदर बाजार, चांदनी चौक, लाजपत नगर, चावड़ी बाजार, कमला नगर, करोल बाग और गांधी नगर जैसे प्रमुख बाजारों में करीब 90 फीसदी पेमेंट UPI के जरिए होती है। संगठन का कहना है कि MDR लागू हुआ तो कुछ दुकानों पर '2000 रुपये से ऊपर UPI नहीं चलेगा, कैश दीजिए' जैसे बोर्ड दिखाई दे सकते हैं। CTI के मुताबिक इससे डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की कोशिशों को नुकसान हो सकता है।

'4% ट्रांजैक्शन, लेकिन 66% वैल्यू'

CTI चेयरमैन के मुताबिक 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन कुल UPI ट्रांजैक्शन का करीब 4 फीसदी हैं, लेकिन वैल्यू के हिसाब से इनकी हिस्सेदारी करीब 66 फीसदी है। उनका कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, कपड़े, ज्वेलरी, फर्नीचर और होलसेल कारोबार जैसे कई सेक्टर में भुगतान की रकम 2000 रुपये से ज्यादा होती है. ऐसे में MDR का असर बड़े मूल्य वाले कारोबारी लेन-देन पर पड़ सकता है।

CTI की मांग- UPI और RuPay डेबिट कार्ड रहें MDR फ्री

CTI ने मांग की है कि UPI और RuPay डेबिट कार्ड को MDR फ्री रखा जाए। संगठन का कहना है कि अगर बैंकों को डिजिटल पेमेंट के संचालन में खर्च की समस्या है तो सरकार उन्हें सीधे इंसेंटिव दे, लेकिन इसका बोझ व्यापारी या ग्राहक पर नहीं डाला जाना चाहिए।CTI ने सरकार से UPI पर MDR लागू करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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