बिहार के सरकारी मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और वहां काम करने वाले शिक्षकों के लिए जरूरी खबर है। राज्य के शिक्षा विभाग ने सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए छह अहम निर्देश जारी किए हैं। इनका पालन सभी जिलों के अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर करना होगा। विभाग का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर करना और विद्यार्थियों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
नए निर्देशों में छात्रों की उपस्थिति, शिक्षकों और कर्मचारियों की उपलब्धता, परीक्षा केंद्र और स्कूल परिसर के इस्तेमाल को लेकर खास ध्यान दिया गया है।
75 फीसदी उपस्थिति जरूरी, परीक्षा केंद्र बनाने पर रोक
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति का नियम सख्ती से लागू किया जाए। यानी छात्रों को नियमित रूप से स्कूल आना होगा।
इसके अलावा इन स्कूलों के परिसर में बाहरी परीक्षाओं के केंद्र नहीं बनाए जाएंगे। अगर किसी विशेष परिस्थिति में ऐसा करना जरूरी हो, तो जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) से दूसरे स्थान की व्यवस्था करने का अनुरोध किया जा सकता है। स्कूलों में पुलिसकर्मियों के रहने या ठहरने की व्यवस्था भी जहां तक संभव हो, नहीं की जाएगी।
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कर्मचारियों की कमी होने पर दूसरे स्कूलों से होगी व्यवस्था
विभाग ने स्कूलों में कर्मचारियों की कमी को दूर करने के निर्देश भी दिए हैं। जिन मॉडल स्कूलों में क्लर्क या अटेंडेंट नियुक्त नहीं हैं, वहां आसपास के दूसरे स्कूलों से कर्मचारियों की व्यवस्था की जाएगी।
सुबह की प्रार्थना सभा को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए जरूरी संगीत उपकरण उपलब्ध कराने और कार्यक्रम की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। जिला प्रशासन की ओर से नियुक्त अधिकारी इन व्यवस्थाओं पर नजर रखेंगे।
विभाग का मानना है कि इन निर्देशों से मॉडल स्कूलों में पढ़ाई और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। जिला अधिकारियों को इन सभी व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण करने और निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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