भारत अपनी विविध भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम (Mausam) के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इस एक देश में आपको हर तरह के मौसम देखने को मिल जाएंगे। भारत में जहां एक तरफ थार जैसा तपता हुआ रेगिस्तान है, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसी जगह भी है जहां इतनी बारिश होती है कि उसने पूरी दुनिया में एक अनोखा रिकॉर्ड बना दिया है। बता दें इस तरह के सवाल न केवल सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए जरूरी है, बल्कि यह देश में होने वाली कई प्रतियोगिता परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नों में से एक है। तो आइए जानते हैं कि भारत में कहां सबसे अधिक बारिश (Rainfall) होती है।
भारत में कहां होती है सबसे अधिक बारिश?
अगर इस सवाल को सुनने के बाद आपका जवाब मौसिनराम (Mawsynram) है, तो आप जवाब एक दम सही है। मौसिनराम, मेघालय राज्य के पूर्वी खासी हिल्स जिले में स्थित यह छोटा सा गांव है। यह दुनिया का सबसे नमी वाला और सबसे अधिक बारिश दर्ज करने वाला स्थान है।
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सालाना 12 मीटर औसत बारिश का रिकॉर्ड
मौसिनराम में सालाना औसत बारिश लगभग 11,871 मिलीमीटर यानी करीब 12 मीटर दर्ज की जाती है। आसान भाषा में इसे समझे तो आप ऐसे समझ सकते हैं कि देश के बाकी हिस्सों में जितनी बारिश पूरे साल होती है, उतनी बारिश यहां महज कुछ ही दिनों या सप्ताह में हो जाती है।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज नाम
मौसिनराम में इतनी अत्यधिक वर्षा होती है कि इसका नाम 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में भी दर्ज है। बता दें कि मौसिनराम से पहले सबसे अधिक वर्षा वाले स्थान का खिताब 'चेरापूंजी' के पास था। लेकिन अब यह स्थान दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा बारिश वाला स्थान बन गया है, क्योंकि पहले स्थान पर मौसिनराम को जाना जाता है।
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आखिर क्यों होती है यहां इतनी ज्यादा बारिश?
मौसिनराम की इस अनोखी खासियत के पीछे यहां की भौगोलिक बनावट है। खासी पहाड़ियों के बीच एक कीप (Funnel) के आकार की घाटी में स्थित है। जब बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नमी से भरी मानसूनी हवाएं उत्तर की ओर बढ़ती हैं, तो वे इन पहाड़ियों के बीच फंस जाती हैं। पहाड़ियों की विशेष बनावट के कारण इन हवाओं को अचानक ऊपर उठना पड़ता है, जिससे वे ठंडी हो जाती हैं और यहां मूसलाधार बारिश के रूप में बरसती हैं।
कैसा है यहां का जनजीवन?
इतनी भारी बारिश के बीच रहना किसी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन यहां के स्थानीय लोग इसके पूरी तरह आदी हो चुके हैं। यहा के लोग घरों से बाहर निकलते समय बांस और पत्तों से बनी एक विशेष छतरी का उपयोग करते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में 'कनुप' (Knup) कहा जाता है। यह छतरी पूरे शरीर को ढक लेती है और हाथों को काम करने के लिए खुला रखती है।
