जिस तरह किसी बड़ी खेल टीम की सफलता के पीछे खिलाड़ियों के साथ डेटा एनालिस्ट, तकनीकी विशेषज्ञ और रणनीतिकारों की पूरी टीम काम करती है, उसी तरह आज के अंतरिक्ष क्षेत्र में भी केवल अंतरिक्ष यात्रियों की जरूरत नहीं है। इस क्षेत्र में तकनीक, डिजाइन, बिजनेस और रिसर्च से जुड़े लोगों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी सोच के साथ बेनेट यूनिवर्सिटी ने अपने ‘दीक्षारंभ 2026’ ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान ‘स्पेसटेक वेंचर कोहोर्ट' (SpaceTech Venture Cohort) की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े स्टार्टअप और नए बिजनेस आइडिया विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
इस पहल का औपचारिक उद्घाटन ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने किया, जो हाल ही में अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने और जिन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर अहम वैज्ञानिक शोध में योगदान दिया। छात्रों से बात करते हुए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष अभियान हो या अपना बिजनेस शुरू करना, दोनों में मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने और उनसे सीखने की क्षमता बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, ''असफलता रास्ते का अंत नहीं है, बल्कि सीखने और खुद को नए सिरे से ढालने का सबसे अच्छा जरिया है।'' उन्होंने आगे कहा कि मेरा यकीन मानिए हमने भी अंतरिक्ष में गलतियां कीं और कई मिशनों को मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा। जब हालात मुश्किल हो, तो आपको अपनी तैयारी और कड़ी मेहनत पर भरोसा करना चाहिए।

Bennett University के दीक्षारंभ 2026 में छात्रों के साथ अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला
कार्यक्रम में खास मेहमान और खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित रोंजन सोढ़ी ने भी छात्रों को मेहनत और लगन के महत्व के बारे में समझाया। दुनिया के पूर्व नंबर 1 डबल ट्रैप शूटर ने टॉप लेवल के स्पोर्ट्स और मुश्किल स्पेस इंडस्ट्री के बीच समानताएं बताईं। सोढ़ी ने कहा, ''चाहे आप पोडियम पर जगह बनाने का लक्ष्य रखें या किसी स्टार्टअप को ऑर्बिट में लॉन्च करने का, फोकस और अटूट लगन जैसे बुनियादी मूल्य बिल्कुल एक जैसे होते हैं।''

स्पोर्ट्स स्टार रंजन सोढ़ी ने बेनेट यूनिवर्सिटी में अपने अनुभव साझा किए
इस कार्यक्रम का उद्देश्य तेजी से बढ़ रहे स्पेस सेक्टर में छात्रों के लिए नए अवसर पैदा करना है। साथ ही यह पुरानी सोच को भी तोड़ता है कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में केवल वैज्ञानिक या एस्ट्रोफिजिक्स की पढ़ाई करने वाले लोग ही काम कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में कोडिंग, डिजाइन, पॉलिसी, लाइफ साइंस, आर्किटेक्चर और बिजनेस जैसे अलग-अलग क्षेत्र के छात्रों को भी मौका दिया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को यह समझाने की कोशिश करना है कि अंतरिक्ष केवल वैज्ञानिक खोज का क्षेत्र नहीं है, बल्कि यहां नए स्टार्टअप शुरू करने और वास्तविक जीवन की बड़ी समस्याओं का समाधान खोजने के भी कई अवसर हैं।

दीक्षारंभ 2026 कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए
यह मैनुअल स्पेस क्षेत्र में उद्यमी बनने के इच्छुक लोगों के लिए A-to-Z गाइड के तौर पर तैयार किया गया है। इसमें अंतरिक्ष से जुड़े बिजनेस और नए आइडिया को आगे बढ़ाने में मदद करने वाली जानकारी दी गई है। इस पहल के जरिए यूनिवर्सिटी का लक्ष्य युवाओं को भविष्य के SpaceTech उद्यमी बनने के लिए तैयार करना है।
शुभांशु शुक्ला ने लॉन्च किया स्पेस फाउंडर्स मैनुअल
इस शैक्षणिक पहल को और मजबूत करते हुए ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने कार्यक्रम में 'स्पेस फाउंडर्स मैनुअल' (Space Founders Manual) भी लॉन्च किया। यह मैनुअल उन लोगों के लिए एक आसान गाइड है, जो स्पेसटेक के क्षेत्र में अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं। इसमें अंतरिक्ष से जुड़े बिजनेस और नए आइडिया को आगे बढ़ाने में मदद करने वाली जानकारी दी गई है।
बता दें ‘दीक्षारंभ 2026’ में अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, खेल जगत के दिग्गज रोंजन सोढ़ी और अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े युवा इनोवेटर्स एक मंच पर आए। इस कार्यक्रम ने छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान और स्टार्टअप की दुनिया को करीब से समझने का मौका दिया। साथ ही छात्रों के सामने अंतरिक्ष क्षेत्र में करियर और अपना बिजनेस शुरू करने के नए रास्ते भी खुले।
