SpaceX के Starship रॉकेट ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह एलन मस्क की कंपनी का एक विशाल रॉकेट है, जो पहली बार में सफलतापूर्वक ऑर्बिट तक पहुंचा। इस मिशन के दौरान नई पीढ़ी के Starlink सैटेलाइट्स को भी अंतरिक्ष में तैनात किया गया। हालांकि, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मिशन को तय समय से पहले खत्म कर दिया गया। Texas से लॉन्च होने के करीब तीन घंटे बाद Starship प्रशांत महासागर में उतरा। लैंडिंग के दौरान स्पेसक्राफ्ट पलट गया और उसमें आग लग गई। इसके बावजूद इस मिशन ने नया मुकाम हासिल किया, और ऑर्बिट तक पहुंचकर सैटेलाइट तैनात किया। SpaceX के लिए यह मिशन इसलिए खास था क्योंकि इससे पहले Starship की टेस्ट उड़ानें पृथ्वी का पूरा चक्कर लगाने वाली ऑर्बिटल उड़ान तक नहीं पहुंच पाई थीं। इस बार रॉकेट करीब 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचा और लगभग 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की कक्षा में आगे बढ़ा।
कंपनी का लक्ष्य था कि यह रॉकेट इस बार करीब 10 घंटे की उड़ान भरेगा। इस दौरान Starship को पृथ्वी के छह चक्कर लगाने थे। लेकिन उड़ान के दौरान एक इंजन समय से पहले बंद हो गया। बाकी सिस्टम ठीक तरह से काम कर रहे थे और उस इंजन की जरूरत भी आगे नहीं थी, फिर भी SpaceX ने जोखिम बढ़ाने के बजाय मिशन को जल्दी खत्म करने का फैसला किया।
SpaceXs Starship (Image- AI Generated/Newsroom Verified)
Starship ने 26 नए Starlink सैटेलाइट भी पहुंचाए
इस मिशन में Starship सिर्फ टेस्टिंग के लिए नहीं गया था, बल्कि यह रॉकेट अपने साथ 26 नए Starlink सैटेलाइट लेकर गया था। इन्हें एक-एक करके ऑर्बिट में तैनात किया गया। Starlink नेटवर्क में पहले से करीब 11,000 सैटेलाइट काम कर रहे हैं। नए सैटेलाइट्स को इस नेटवर्क में शामिल करने से SpaceX के सैटेलाइट इंटरनेट कारोबार को भी बढ़ावा मिलेगा।
मिशन को बीच में रोकने के फैसले पर SpaceX ने कहा, 'यह कदम अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए उठाया गया था।'
आखिर Starship इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
Starship को SpaceX ने ऐसे डिजाइन किया है कि इसे पूरी तरह दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। यह करीब 407 फीट यानी 124 मीटर ऊंचा है, यह रॉकेट दुनिया में बनाए गए सबसे बड़े और ताकतवर रॉकेट्स में से एक है। अगर Starship को बार-बार सुरक्षित तरीके से लॉन्च और वापस लाने में सफलता मिलती है, तो अंतरिक्ष में सामान और सैटेलाइट भेजने की लागत कम हो सकती है। यही वजह है कि SpaceX इसे भविष्य के बड़े अंतरिक्ष अभियानों के लिए तैयार कर रही है।
SpaceXs Starship (Image- AI Generated/Newsroom Verified)
कंपनी की योजना आगे चलकर Starship को वापस Starbase लॉन्च साइट पर लाने की है। इसके बाद मैकेनिकल आर्म्स की मदद से उड़ते हुए स्पेसक्राफ्ट को हवा में पकड़ना संभव हो सकेगा।
NASA के Moon Mission में भी Starship की बड़ी भूमिका
Starship की सफलता सिर्फ SpaceX के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। NASA के Artemis कार्यक्रम में भी इसकी भूमिका अहम है। NASA चांद पर इंसानों को फिर से भेजने की तैयारी कर रहा है और Starship को संभावित Lunar Lander के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
Artemis III मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को चांद तक पहुंचाने के लिए कई अंतरिक्ष यानों के बीच ऑर्बिट में डॉकिंग की योजना है। आगे Artemis IV और उसके बाद के मिशनों में भी Starship का इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए रॉकेट को जरूरी तकनीकी और सुरक्षा मानकों पर खरा उतरना होगा।
SpaceXs Starship (Image- AI Generated/Newsroom Verified)
Musk का टारगेट क्या और कहां तक है?
एलन मस्क ने Starship को शुरुआत से ही मंगल मिशन को ध्यान में रखकर डेवलप कराया है। Musk भविष्य में बड़ी संख्या में Starship भेजकर मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। फिलहाल SpaceX का फोकस चांद, सैटेलाइट लॉन्च और Starship की तकनीक को पूरी तरह साबित करने पर है। कंपनी आगे चलकर बड़ी संख्या में सैटेलाइट एक साथ ऑर्बिट में भेजने के लिए भी Starship का इस्तेमाल करना चाहती है।
SpaceX टेक्सास के अलावा फ्लोरिडा के Kennedy Space Center में एक और Starship लॉन्च साइट तैयार कर रही है, जबकि लुइसियाना में तीसरी लॉन्च साइट की भी योजना है।
SpaceXs Starship (Image- AI Generated/Newsroom Verified)
आगे क्या होगा?
ऑर्बिटल टेस्ट से जो आंकड़े मिले हैं, अब उनका बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। इसके अलावा इंजन पर क्या प्रभाव पड़ा, समस्या क्या आई, हीट शील्ड और दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले सिस्टम की जांच भी होगी। अगर आने वाली टेस्ट उड़ानों में Starship लगातार बेहतर प्रदर्शन करता है, तो SpaceX इसे नियमित ऑर्बिटल मिशनों के लिए इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। इसके बाद सैटेलाइट लॉन्च से लेकर चांद और भविष्य में मंगल मिशन तक इसका दायरा बढ़ सकता है।
