दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के आरोप पर दिल्ली पुलिस का बयान, गेट तोड़े जाने की खबर गलत

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Dec 10, 2020, 08:47 PM IST

डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के आवास के गेट तोड़े जाने के मुद्दे पर दिल्ली पुलिस ने ट्वीट कर अपना पक्ष रखा है। पुलिस का कहना है कि गेट तोड़े जाने की बात गलत है, एफआईआर दर्ज कर जांच की जा रही है।

दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के आरोप पर दिल्ली पुलिस  का बयान, गेट तोड़े जाने की खबर गलत

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के आवास पर 'बीजेपी के गुंडों ने हमला' किया। यह बात अलग है कि दिल्ली बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा कि उन लोगों की तरफ से शांतिपूर्ण तरीके से ही प्रदर्शन किया गया। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने केजरीवाल सरकार से बकाए के भुगतान की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना दे रहे पार्टी शासित नगर निगमों के नेताओं एवं महापौरों की हत्या करने के कथित षड्यंत्र को लेकर सिसोदिया के आवास के निकट प्रदर्शन किया था।

दिल्ली महिला आयोग ने लिया संज्ञान
दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने 7 दिसंबर को अपने सरकारी आवास के अंदर दिल्ली के डिप्टी सीएम के परिवार पर कथित भीड़ के हमले की मीडिया रिपोर्टों पर आत्म-मोटो संज्ञान लिया। DCW ने डीसीपी, नई दिल्ली जिले को नोटिस जारी किया है घटना से संबंधित जानकारी देने के लिए कहा गया है।




दिल्ली पुलिस ने ट्ववीट के जरिए बताया है कि गेट के क्षतिग्रस्त या टूटे होने के आरोप गलत हैं। दिल्ली के डिप्टी सीएम के सचिव सी अरविंद की शिकायत पर उचित धाराओं के तहत एक उचित अपराध दर्ज किया गया है और जांच चल रही है। 

मनीष सिसोदिया के हैं आरोप
दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि बीजेपी के गुंडों ने आज बीजेपी के गुंडे मेरी ग़ैरमौजूदगी में मेरे घर के दरवाज़े तोड़कर अंदर घुस गए और मेरे बीवी बच्चों पर हमला करने की कोशिश की। अमित शाह जी  आज आप दिल्ली में राजनीति में हार गए तो अब इस तरह से हमें निपटाएँगे?

सिसोदिया ने कहा कि विधानसभा चुनाव में हार से सदमे से बीजेपी उबर नहीं पाई है और उसका असर दिखाई देता है।दिल्ली के तीनों नगर निगमों पर बीजेपी का कब्जा है और कुछ भी काम नहीं हो रहा है, जनता सवाल करती है तो उनके मेयर धरने पर बैठ जाते हैं,दिल्ली सरकार पर सौतेलेपन का आरोप लगाते हैं। लेकिन सच तो यह है कि निगमों पर काबिज बीजेपी काम करना ही नहीं चाहती है। 

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