क्राइम

फर्जी नौकरी, असली सैलरी! अमेरिका में करन गुप्ता का कारनामा, दोस्त को जॉब दिलाकर अपनी ही कंपनी से लेते रहा 45 लाख सलाना

अमेरिका में एक भारतीय मूल के शख्स ने अपने अयोग्य दोस्त को नौकरी पर रखकर कंपनी को लाखों रुपये का चूना लगा दिया। करन गुप्ता नाम के शख्स ने दोस्त को नौकरी पर रखा, अच्छी सैलरी और पोस्ट दिलवाया और फिर उसकी आधी सैलरी लेते रहा।

Image

अमेरिकी में फ्रॉड करने वाला करन गुप्ता दोषी करार (फोटो-FBI)

अमेरिका में एक भारतीय मूल के शख्स करन गुप्ता ने अलग तरह का ही फ्रॉड किया है। FBI के अनुसार करन गुप्ता ने अपनी ही कंपनी में एक अयोग्य दोस्त को पहले नौकरी पर लगवाया और फिर उसकी सैलरी का आधा से ज्यादा हिस्सा वसूलते रहा है। करन गुप्ता उसी कंपनी में सीनियर डायरेक्टर था। इसी दौरान उसने कंपनी के साथ ये फ्रॉड किया। इस मामले में अब करन गुप्ता दोषी करार दिया गया है।

कहां से शुरू हुआ खेल

अदालती दस्तावेजों और ट्रायल के दौरान पेश साक्ष्यों के अनुसार,करन गुप्ता सीनियर डायरेक्टर (डेटा एनालिटिक्स) के पद पर कार्यरत था। जहां उसकी सलाना सैलरी 2,60,000 डॉलर से अधिक थी यानि आज की तारीख में यह 2 करोड़ 35 लाख 75 हजार रुपये थी। तब ये थोड़ा कम रहा होगा। इसी पद पर रहने के दौरान गुप्ता ने अपने एक दोस्त को नौकरी पर रखा, जिसकी सलाना सैलरी 1,00,000 डॉलर से अधिक थी, मतलब 90 लाख के आसपास। यहां तक देखने में सब ठीक लगता है, लेकिन असल खेल यहीं से शुरू हुआ था। करन गुप्ता ने अपने जिस दोस्त को नौकरी पर रखा था, वो उस पद मैनेजरियल डेटा इंजीनियर के लिए योग्य ही नहीं था। गुप्ता ने उसका फर्जी रेज्यूमे बनवाया और उसी आधार पर उसे नौकरी पर रख लिया। खुद ही उसका सुपरवाइजर भी बन गया।

कमीशन में आधी सैलरी

अयोग्य होने के बाद भी करन गुप्ता ने इसलिए अपने दोस्त को नौकरी पर नहीं रखा था, क्यों कि उससे दोस्ती थी, बल्कि कमीशन का खेल था। दोनों के बीच तय था कि आधी सैलरी खुद करन गुप्ता लेगा। दोस्त को सलाना 45 लाख से कम ही मिले। इसके बाद दोस्त भी अपनी टशन में रहा। कंपनी में कोई काम किया ही नहीं। लगभग चार वर्षों तक करन के दोस्त ने कोई काम किए बिना वेतन लिया। उसकी शुरुआती सैलरी 1,00,000 डॉलर से अधिक थी, जो समय-समय पर बढ़ोतरी और बोनस के साथ बढ़ती गई। रिकॉर्ड के अनुसार, वह शायद ही कभी ऑफिस लॉग-इन करता था, लगभग कोई ईमेल नहीं भेजता था और कंपनी के अन्य कर्मचारियों से उसका कोई संपर्क नहीं था।

कैसे लेता था कमीशन के पैसे

अभियोजन पक्ष के अनुसार, गुप्ता ने अपने मित्र से उसकी अवैध रूप से अर्जित सैलरी का आधे से अधिक हिस्सा ‘किकबैक’ के रूप में मांगा। दोनों ने इन भुगतानों को छिपाने की योजना भी बनाई। शुरुआत में मित्र न्यू जर्सी में अपने बैंक खाते से नकद रकम निकालकर गुप्ता के बैंक की शाखा में जमा करता था, ताकि गुप्ता कैलिफोर्निया में उन पैसों का उपयोग कर सकें। बाद में, मित्र ने एक नया चेकिंग अकाउंट खुलवाया, जिसमें कंपनी से सीधे वेतन जमा होता था। इस खाते का डेबिट कार्ड गुप्ता को भेज दिया गया, जिसे गुप्ता कैलिफोर्निया में एटीएम से नकद निकालने के लिए इस्तेमाल करता था।

कैसे खुला मामला

नवंबर 2019 में गुप्ता को एक अन्य धोखाधड़ी मामले में कंपनी द्वारा बर्खास्त किया गया। उसी दौरान कंपनी ने जांच शुरू की और मामला संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दिया। जांच में सामने आया कि गुप्ता द्वारा की गई धोखाधड़ी से कंपनी को कुल मिलाकर 1.2 मिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ। एफबीआई के मिनियापोलिस फील्ड ऑफिस के कार्यवाहक स्पेशल एजेंट इन चार्ज रिक इवानचेक ने कहा कि गुप्ता ने अपने भरोसेमंद पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी पद पर ‘घोस्ट कर्मचारी’ नियुक्त किया, ताकि वर्षों तक लाखों डॉलर के किकबैक हासिल किए जा सकें। उन्होंने कहा कि एफबीआई ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों को कानून के कटघरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमार author

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय ... और देखें

End of Article