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Crime News In Mahoba: सनकी आशिक ने 6 महीने में किए 6000 से ज्यादा कॉल, युवती पर एसिड फेंकने और जान से मारने की दी धमकी

यूपी में बुंदेलखंड के जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक सनकी आशिक ने सिर्फ छह महीने में परिवहन निगम की महिला परिचालक को 6,159 बार फोन कॉल कर परेशान किया। उसने लगातार 315 मैसेज भेजकर भी युवती को शादी के लिए मजबूर किया।

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सनकी आशिक के खिलाफ युवती ने दर्ज कराई शिकायत (फोटो - टाइम्स नाउ नवभारत)

Crime News In Mahoba: यूपी में बुंदेलखंड के जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक सनकी आशिक ने सिर्फ छह महीने में परिवहन निगम की महिला परिचालक को 6,159 बार फोन कॉल कर परेशान किया। उसने लगातार 315 मैसेज भेजकर भी युवती को शादी के लिए मजबूर किया। चरखारी कस्बे की रहने वाली पीड़िता महोबा डिपो में परिचालक के पद पर कार्यरत है और इस खौफनाक हरकत के चलते दहशत के साए में जी रही है।

पीड़िता ने बताया कि आरोपी रहीस ने एक मोबाइल नंबर से 4,387 बार और दूसरे नंबर से 1,772 बार कॉल किए। शादी से इनकार करने पर उसने युवती को जान से मारने और एसिड अटैक की धमकी दी। इतना ही नहीं, पीड़िता के पिता को भी डराया कि यदि उसकी बात नहीं मानी तो युवती का चेहरा तेजाब से जला देगा।

युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई

युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उसने बताया कि यह उत्पीड़न का सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। दो साल पहले भी रहीस ने परेशान किया था और उस समय आरोपी व उसके परिजनों ने लिखित हलफनामा देकर ऐसी हरकत न दोहराने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब फिर से वही सनक हदें पार कर रही है। आते-जाते पीछा करना, रास्ता रोक लेना और जबरन शादी के लिए बदनाम करने की धमकी जैसी हरकतें करता था।

आरोपी के परिजनों पर लगाया आरोप

पीड़िता का कहना है कि अब आरोपी के परिजन भी शादी के लिए दबाव बना रहे हैं और मना करने पर जिंदगी बर्बाद करने की धमकी देते हैं। युवती अकेले अपने बुजुर्ग बीमार पिता की देखभाल करती है और ड्यूटी पर जाते समय खौफ में रहती है। उसने कहा कि आरोपी ने बदनाम करने और पिता की हत्या करने की धमकी भी दी है। पीड़िता ने मुख्यमंत्री योगी और पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। सीओ चरखारी रवीकांत गौड़ ने बताया कि आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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