कोलकाता महिला डॉक्टर रेप केस में कोर्ट ने संदीष घोष के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रचार्य संदीप घोष की जमानत याचिक खारिज करते हुए कहा कि संदीष घोष के खिलाफ गंभीर आरोप लगे हैं, अगर वो साबित हो गए तो फांसी की सजा हो सकती है।
कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा
सीबीआई से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केस डायरी से ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच की प्रक्रिया जोरों पर है। घोष की जमानत याचिका को खारिज करते हुए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एस डे ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और यदि ये साबित हो जाते हैं तो इसमें मृत्युदंड की सजा हो सकती है, जो दुर्लभतम मामलों में दी जाती है।
जमानत पर रिहा करना समता के सिद्धांत का उल्लंघन-कोर्ट
न्यायाधीश ने कहा कि अदालत की राय है कि आरोपी को जमानत पर रिहा करना समता के सिद्धांत का उल्लंघन होगा। उन्होंने आदेश में कहा कि एक व्यक्ति दूसरों की मदद से अपराध कर सकता है और अन्य आरोपियों को घटना स्थल पर मौजूद रहने की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने अभिजीत मंडल की जमानत याचिका भी खारिज कर दी। इसने 30 सितंबर तक दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के सीबीआई के अनुरोध को स्वीकार कर लिया।
संदीप घोष के वकील ने क्या कहा
घोष के वकील ने यहां सियालदह अदालत में न्यायाधीश के समक्ष दावा किया कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया था और अपराध में उनकी कोई भूमिका नहीं है जैसा आरोप लगाया गया है। सीबीआई ने नौ अगस्त को सरकारी अस्पताल में एक चिकित्सक से कथित बलात्कार और हत्या के मामले में सबूतों से छेड़छाड़ और प्राथमिकी दर्ज करने में देरी के आरोप पर घोष और ताला पुलिस थाने के पूर्व प्रभारी अभिजीत मंडल को गिरफ्तार किया था।
