Delhi News: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना नदी को दोबारा राजधानी की जीवनरेखा बनाने के लिए बड़े स्तर पर कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री का साफ कहना है कि यमुना सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि दिल्ली के पर्यावरण और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। सरकार ने तय किया है कि साल 2028 तक यमुना में किसी भी तरह का बिना ट्रीट किया गया गंदा पानी नहीं गिरने दिया जाएगा। मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यमुना की मौजूदा स्थिति, सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम, नालों की सफाई, औद्योगिक प्रदूषण और सीवर नेटवर्क विस्तार जैसे मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक में जल बोर्ड, नगर निगम, PWD, DPCC, DDA समेत सभी प्रमुख विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता दोगुनी करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल दिल्ली के 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट रोजाना 814 एमजीडी गंदे पानी का उपचार कर रहे हैं। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने इसे बढ़ाकर 1500 एमजीडी करने का लक्ष्य तय किया है। इस योजना के तहत पुरानी मशीनों का अपग्रेडेशन दिसंबर 2027 तक अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जाएगी। वहीं 35 नए डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और नालों के पास बड़े नए प्लांट लगाकर दिसंबर 2028 तक सैकड़ों एमजीडी अतिरिक्त ट्रीटमेंट क्षमता विकसित की जाएगी। योजना पूरी होने के बाद यमुना में गंदे पानी की एंट्री पूरी तरह बंद हो जाएगी।
अनधिकृत कॉलोनियों और जेजे क्लस्टर्स पर फोकस
यमुना प्रदूषण का बड़ा कारण सीवर नेटवर्क से बाहर रहने वाले इलाके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक हर घर सीवर सिस्टम से नहीं जुड़ेगा, तब तक यमुना को पूरी तरह साफ करना संभव नहीं है। दिल्ली के अधिकांश जेजे क्लस्टर्स में सीवर का काम पूरा किया जा चुका है, जबकि बाकी इलाकों में सिंगल-पॉइंट सीवेज कलेक्शन की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, अनधिकृत कॉलोनियों को चरणबद्ध तरीके से 2026 से 2028 के बीच सीवर नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे नालों के जरिए गंदा पानी यमुना में जाने से रोका जा सकेगा।
ड्रोन निगरानी और नालों पर सख्त नजर
नालों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार ने ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली शुरू की है। प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियां तय स्थानों पर नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता की जांच कर रही हैं। नजफगढ़ और शाहदरा ड्रेन से जुड़े नालों की ड्रोन मैपिंग तय समयसीमा में पूरी की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रदूषण कहां से और कितनी मात्रा में नदी में जा रहा है।
औद्योगिक प्रदूषण पर कार्रवाई
यमुना की सफाई में हरियाणा और उत्तर प्रदेश की भूमिका भी अहम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पड़ोसी राज्यों से आने वाले नाले भी प्रदूषण का बड़ा स्रोत हैं। इस मुद्दे पर संबंधित मुख्यमंत्रियों से समन्वय कर ठोस समाधान निकाला जाएगा। औद्योगिक प्रदूषण को लेकर भी सरकार सख्त रुख अपनाएगी। नियोजित औद्योगिक क्षेत्रों के ट्रीटमेंट प्लांट की नियमित जांच होगी, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी कहा कि यमुना की सफाई सिर्फ एक सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि दिल्ली के भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प है। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राज्यों के सहयोग से यमुना को फिर से स्वच्छ और जीवंत बनाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर पर्यावरण मिल सके।
