हरियाणा को जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल हुई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को बताया कि विश्व बैंक ने राज्य की महत्वाकांक्षी ’जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना के लिए 4,000 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल लागत 5,714 करोड़ रुपये है और इसे साल 2026 से 2032 के बीच चरणों में लागू किया जाएगा।
जल संकट से निपटने के लिए हरियाणा का बड़ा कदम
चंडीगढ़ में वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना का मकसद हरियाणा को जल सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। इस परियोजना के तहत राज्य के 48.94 लाख एकड़ एरिया में फैले 15 क्लस्टरों को कवर किया जाएगा। उन्होंने सभी विभागों को पानी के प्रबंधन की व्यापक योजना तैयार करने और उसे जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।
620 जल चैनलों का होगा पुनर्वास
इस परियोजना के तहत हरियाणा की शेष 678 नहरों का पुनर्वास और आधुनिकीकरण किया जाएगा। जिनमें 106 नहरों का सुधार विश्व बैंक की मदद से लगभग 2,484.87 करोड़ रुपये की लागत से होगा। वहीं 293 नहरों का सुधार राज्य सरकार के वित्तपोषण से और 279 नहरों का विकास नाबार्ड समर्थित योजनाओं के तहत किया जाएगा। इसके अलावा 620 जल चैनलों का पुनर्वास भी योजना में शामिल है। जिससे लगभग 3.18 लाख एकड़ कृषि भूमि को फायदा होगा। 120 नहर आधारित माइक्रो इरिगेशन परियोजनाओं को भी उन्नत किया जाएगा, जिससे करीब 56,830 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मजबूत होगी।
परियोजना के तहत करीब दो लाख एकड़ जलभराव वाली जमीन को फिर से उपयोग योग्य बनाने का कार्य किया जाएगा। इसके अलावा पांच लाख एकड़ में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक को बढ़ावा देने और 1.12 लाख एकड़ क्षेत्र में फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने की योजना भी इसमें शामिल है। वहीं ग्राउंड वॉटर लेवल सुधारने के लिए भिवानी, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी और सिरसा जिलों में 147 जलाशयों का विकास किया जाएगा। इसके अलावा जींद, कैथल और गुरुग्राम के धनवापुर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के साफ जल का इस्तेमाल सिंचाई में किया जाएगा।
