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कोलकाता के अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में रंगों का 'युद्ध'; कलाकारों ने रंगा सफेद, 24 घंटे में बीजेपी ने फिर चढ़ा दिया भगवा

Kolkata Culture Politics War: कोलकाता के अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में रंग को लेकर सियासी जंग। थिएटर कलाकारों द्वारा सफेद रंग किए जाने के 24 घंटे के भीतर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने फिर रंगा भगवा।

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कोलकाता के अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में रंगों का 'युद्ध'; कलाकारों ने रंगा सफेद, 24 घंटे में बीजेपी ने फिर चढ़ा दिया भगवा

Academy of Fine Arts Kolkata: पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता की प्रसिद्ध 'अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स' इन दिनों कला प्रदर्शनी से इतर एक अनोखी 'रंगों की जंग' का केंद्र बन गई है। अकादमी के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित टिकट काउंटर के कमरे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब वामपंथी विचारकों, थिएटर कलाकारों और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधी सियासी भिड़ंत में बदल चुका है।

मंगलवार को सफेद, बुधवार को फिर हुआ भगवा

इस विवाद की शुरुआत जुलाई के पहले सप्ताह (5-6 जुलाई) में हुई थी, जब टिकट काउंटर को अचानक भगवा रंग से रंग दिया गया था।

मंगलवार का घटनाक्रम: थिएटर कलाकारों और वामपंथी कार्यकर्ताओं के एक समूह ने भगवाकरण का विरोध करते हुए इस कमरे को दोबारा सफेद रंग में पोत दिया। इस विरोध प्रदर्शन में वरिष्ठ वामपंथी नेता व अधिवक्ता बिकास रंजन भट्टाचार्य भी मौजूद थे।

बुधवार की पलटवार कार्रवाई: सफेद रंग किए जाने के 24 घंटे के भीतर ही बुधवार को बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं का दल वहां पहुंचा और "भारत माता की जय" के नारों के बीच उस कमरे को दोबारा भगवा रंग से रंग दिया।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर

कला बनाम राजनीति: दोनों पक्षों के दावे

बीजेपी का पक्ष रखते हुए विधायक रुद्रनील घोष ने कहा, 'इस कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे हावड़ा शिवपुर से बीजेपी विधायक व अभिनेता रुद्रनील घोष ने कहा कि इस स्थान पर पहले से ही भगवा रंग का इस्तेमाल होता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी विचारधारा के लोग जानबूझकर इस मुद्दे को तूल दे रहे हैं।'

कलाकारों और थिएटर बिरादरी का रुख: थिएटर जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी कला संस्थान का अचानक राजनीतिक या धार्मिक आधार पर भगवाकरण करना बंगाली कला, परंपरा और सौंदर्यबोध के पूरी तरह खिलाफ है। कलाकारों ने पूर्व में बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व को पत्र लिखकर भी अपना विरोध दर्ज कराया था।

1933 में स्थापित धरोहर पर सियासत

1933 में लेडी रानू मुखर्जी द्वारा स्थापित अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्रों में से एक है, जिसमें विशाल आर्ट गैलरी, थियेटर ऑडिटोरियम और दुर्लभ चित्रों का संग्रह है। कमरे के रंग को लेकर उठा यह विवाद अब बंगाल की बौद्धिक विरासत और राजनीतिक विचारधाराओं के सीधे टकराव का प्रतीक बन गया है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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