Abe Memorial Corridor: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी में आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए भारत-जापान की पार्टनरशिप को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत की पहली यात्रा पर आए स्वर्गीय शिंजो आबे सान ने भारत की संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि मजबूत भारत जापान के सर्वोत्तम हित में है और मजबूत जापान भारत के सर्वोत्तम हित में है। 2014 में क्योटो में काशी-क्योटो पार्टनरशिप पार्टनर सिटी समझौता हुआ।
उन्होंने आगे कहा, पीएम मोदी और स्वर्गीय आबे सान की मित्रता ऐसी ही थी, 2021 में उन्हें भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। यह एक सच्चे मित्र का सम्मान था। उन्होंने कहा, ''पीएम स्वयं अपने मित्र को अंतिम विदाई देने टोक्यो पहुंचे। पूरे भारत ने राष्ट्रीय शोक मनाया। यह प्रोटोकॉल नहीं था, एक रिश्ता था।''
'देश में 1400 जापानी कंपनियां कर रही काम'
मुख्यमंत्री योगी ने आगे कहा, ''हमारे यहां मध्यकालीन प्रख्यात संत गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है, निज दुख गिरि सम रज करि जाना। मित्रक दुख रज मेरु समाना। यानी अपने पहाड़ जैसे दुःख को धूल समझे और मित्र के धूल जैसे दुःख को पहाड़, यही मित्रता की कसौटी भी है।'' उन्होंने कहा कि आज लगभग 1400 जापानी कंपनियां भारत में कार्य कर रही हैं। अब भारत जापान की साझेदारी भविष्य के क्षेत्रों सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुंच चुकी है।
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उन्होंने कहा कि भारत सौभाग्यशाली है। हमें जापान के रूप में ऐसा ही सच्चा मित्र मिला है। दुनिया इंटरेस्ट देखकर रिश्ते बनाती है। भारत और जापान के रिश्ते ट्रस्ट पर आधारित हैं, यानी विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, ''भारत और जापान ऐसे देश हैं जिन्होंने अपनी विरासत और परंपराओं को अपने दैनिक जीवन और कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाए रखा है। जापान की संस्कृति हजारों वर्षों की समृद्ध परंपरा में विकसित हुई और उस पर शिंतो तथा बौद्ध परंपरा का गहरा प्रभाव रहा है। प्रकृति के प्रति सम्मान, पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और आध्यात्मिक संतुलन जापानी सोशल लाइफ के महत्वपूर्ण आधार हैं।''
