Uttarkashi Cloudburst: उत्तरकाशी के धराली में आई तबाही के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। इसी बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को घोषणा की कि उत्तरकाशी में बादल फटने के कारण आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के लिए वे अपनी एक माह की तनख्वाह दान करेंगे।
इस घोषणा के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरकाशी जिले के धाराली और हर्षिल क्षेत्रों में राज्य सरकार द्वारा युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य जारी हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, स्वैच्छिक संगठनों और आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपनी क्षमता के अनुसार राहत कार्यों में सहयोग करें।
274-275 लोगों को सुरक्षित बचाया गया
इस बीच, NDRF ने राज्य में खराब मौसम और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। NDRF के उप महानिरीक्षक (DIG) मोसेन शाहेदी ने गुरुवार को बताया कि उत्तराखंड में NDRF की कुल 18 टीमें तैनात की गई हैं। इनमें से चार टीमें धाराली क्षेत्र में कार्यरत हैं, जबकि अन्य टीमें स्टैंडबाय पर हैं। उन्होंने बताया कि राहत कार्यों के लिए एक संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है और अब तक 274-275 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। बादल फटने और भारी वर्षा की घटना के दो दिन बाद, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) ने गुरुवार को जानकारी दी कि गंगोत्री में फंसे 21 और नागरिकों को नेलोंग से हर्षिल तक हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाला गया।
इन जगहों के लोगों किया गया रेस्क्यू
सीमा सड़क संगठन (BRO) के अमित कुमार ने बताया कि इस अभियान में उनकी चार मशीनें काम कर रही हैं। उन्होंने बताया, “हमारे महानिदेशक और प्रमुख अधिकारी यहां पहुंचे हैं। अभी भी लगभग 20-40 मकान मलबे में दबे हैं और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। BRO, ITBP, NDRF और SDRF की मदद से अब तक 150-175 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। अब तक कुल पांच शव बरामद किए गए हैं।” इससे पहले बुधवार को उत्तराखंड सरकार ने जानकारी दी थी कि गंगोत्री और आसपास के क्षेत्रों में फंसे 274 लोगों को हर्षिल सुरक्षित पहुंचाया गया है। इनमें 131 लोग गुजरात से, 123 महाराष्ट्र से, 21 मध्य प्रदेश से, 12 उत्तर प्रदेश से, छह राजस्थान से, सात दिल्ली से, पांच असम से, पांच कर्नाटक से, तीन तेलंगाना से और एक पंजाब से हैं। सभी लोग सुरक्षित हैं और उन्हें उत्तरकाशी या देहरादून भेजा जा रहा है।
उत्तराखंड में मौसम का हाल
मानसून के आगमन के बाद से ही पहाड़ी राज्यों में इसका असर जबरदस्त रूप में देखने को मिला है। भारी बारिश के कारण उत्तराखंड में जनजीवन कई तरह से अस्त-व्यस्त हुआ है। बात अगर यहां की मौसम की करें तो मौसम विभाग के अनुसार, आज देहरादून, चमोली, उत्तरकाशी, पौड़ी, बागेश्वर, उधम सिंह नगर, पिथौरागढ़, नैनीताल और चंपावत जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। अन्य जिलों में भी गरज-चमक के साथ तेज से बहुत तेज बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। फिलहाल, अगले दो दिनों तक मौसम इसी तरह बना रह सकता है। साथ ही मौसम विभाग ने राज्य में 12 अगस्त तक रेड अलर्ट जारी किया है।
चारधाम यात्रा हुई प्रभावित
खराब मौसम, मार्ग बाधित होने और आपदा की स्थिति को देखते हुए चारधाम यात्रा पर असर पड़ा है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री धाम की यात्रा फिलहाल स्थगित कर दी गई है, जबकि यमुनोत्री धाम के लिए केवल छोटे वाहनों को ही अनुमति दी जा रही है। प्रशासन लगातार तीर्थयात्रियों से अपील कर रहा है कि वे वर्तमान हालात को देखते हुए यात्रा से फिलहाल परहेज करने की सलाह दी है। केदारनाथ में भारी बारिश के अलर्ट को ध्यान में रखते हुए 7 और 8 अगस्त को यात्रा रोक दी गई थी। वहीं, पीपलकोटी के आगे बदरीनाथ हाईवे का लगभग 30 मीटर हिस्सा बह जाने के कारण बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है।
गढ़वाल मंडल आयुक्त ने राहत कार्यों की दी जानकारी
गढ़वाल मंडल के आयुक्त विनय शंकर पांडे ने बताया कि उत्तरकाशी जिले के प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं। उन्होंने बताया, “बीते दिन हमने 382 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया था। हमारा राहत अभियान तीन प्रमुख स्तरों पर संचालित हो रहा है – पहला, गंगोत्री धाम और आसपास के क्षेत्रों में फंसे स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालना; दूसरा, बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित सड़कों की कनेक्टिविटी बहाल करना; और तीसरा, धराली गांव में हुए नुकसान के बाद पुनर्निर्माण की योजना बनाना और मलबा हटाने का कार्य करना।” आयुक्त ने बताया कि आज सुबह तक 44 और लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। राज्य की हेली सेवा लगातार सक्रिय है और राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद उत्तरकाशी में मौजूद हैं और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
बचाव अभियान में ये चीजें शामिल
अब तक 357 लोगों को एयर और ग्राउंड ऑपरेशन के माध्यम से सुरक्षित निकाला जा चुका है। बचाव अभियान में सेना की टीमें, इंजीनियर, मेडिकल यूनिट, अत्याधुनिक कम्युनिकेशन उपकरण और रेस्क्यू डॉग्स शामिल हैं। साथ ही, NDRF के 105 कर्मी, SDRF की टीम और 10 सर्च डॉग्स भी राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। ITBP की मेडिकल टीम हर्षिल और धाराली में चिकित्सा सहायता प्रदान कर रही है। मौके पर डॉक्टर, नर्सिंग असिस्टेंट और कॉम्बैट मेडिक्स तैनात हैं, जो घायल और बीमार लोगों को प्राथमिक इलाज दे रहे हैं। अब तक निकाले गए लोगों में 355 नागरिक शामिल हैं, जिनमें से 119 को एयरलिफ्ट कर देहरादून भेजा गया है। इसके अलावा 13 सैनिकों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया है। दुर्भाग्यवश, 2 नागरिकों की मृत्यु की पुष्टि हुई है, जबकि 14 राज राइफल्स के 8 जवानों सहित करीब 100 नागरिक अभी भी लापता हैं।
क्या है अब तक की अपडेट
7 अगस्त को कुल 68 हेलीकॉप्टर उड़ानें संचालित की गईं, जिनमें वायुसेना की 6, सेना की 7 और सिविल ऑपरेटरों की 55 उड़ानें शामिल थीं। देहरादून, हर्षिल, मतली और धारासु ALG के बीच हवाई संपर्क स्थापित किया गया है और C-295 विमानों से राहत सामग्री और लोगों को परिवहन किया जा रहा है। संचार व्यवस्था बहाल करने के लिए सेना ने हर्षिल में एक कम्युनिकेशन कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जिसमें वाई-फाई और सैटेलाइट कनेक्शन चालू कर दिए गए हैं। BSNL और एयरटेल नेटवर्क को बहाल करने के प्रयास भी तेज़ी से चल रहे हैं। GOC, उत्तर भारत एरिया और 9 (I) माउंटेन ब्रिगेड के कमांडर मौके पर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। 8 अगस्त की योजना के तहत लिमचिगाड़ में बेली ब्रिज लगाकर सड़क मार्ग बहाल किया जाएगा, हवाई मार्ग से आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई जाएगी, हर्षिल और आसपास के क्षेत्रों में खोज अभियान जारी रहेगा और बाकी बचे लोगों को हर्षिल से मतली और देहरादून तक एयरलिफ्ट किया जाएगा।
