शहर

उत्तराखंड में बारिश का कहर, कई जगह क्षतिग्रस्त हुआ गोमुख मार्ग; आवाजाही बंद

Uttarakhand Rainfall: उत्तराखंड में बारिश का तांडव देखने को मिल रहा है, जिसके चलते यात्रियों को मुश्किल झेलनी पड़ रही है। वहीं गोमुख मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया और इस मार्ग पर आवाजाही बंद हो गई है। गोमुख जाने पर रोक लगाने से गंगोत्री धाम के व्यापारियों ने नाराजगी व्यक्त की है।

Image

उत्तराखंड में भारी बारिश

Photo : BCCL

Gomukh Road Damaged Due to Rain: लगातार हो रही बारिश के कारण गोमुख मार्ग के कई जगह क्षतिग्रस्त होने के मद्देनजर गंगोत्री पार्क प्रशासन ने लोगों के गोमुख जाने पर रोक लगा दी है । पार्क प्रशासन ने इस संबंध में गंगोत्री धाम और कनखू बैरियर पर नोटिस बोर्ड लगा दिए हैं जिनमें कहा गया है कि गोमुख मार्ग जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया है, इसलिए उस पर आवाजाही बंद की गयी है। गौरतलब है कि श्रद्धालुओं के अतिरिक्त सावन के महीने में चलने वाली कांवड़ यात्रा के दौरान अनेक कांवड़िए गंगा जल भरने के लिए गोमुख तक जाते हैं।

बारिश के चलते फंस गए थे 38 अन्य लोग

पिछले दिनों बारिश के कारण गंगोत्री नेशनल पार्क के देवगाड़, चीड़बासा, भोजगड्डी नाले उफान पर आ गए थे, जिससे वहां एक पुलिया बह गई थी और उसी दौरान वहां से गुजर रहे दिल्ली निवासी दो कांवड़िए बह गए थे। इसके साथ ही वहां 38 अन्य लोग फंस गए थे जिन्हें राज्य आपदा प्रतिवादन बल की मदद से बाहर निकाला गया था।

गंगोत्री धाम के व्यापारियों ने व्यक्त की नाराजगी

पार्क प्रशासन के गोमुख जाने पर रोक लगाने से गंगोत्री धाम के व्यापारियों ने नाराजगी व्यक्त की है। व्यापारी सतेंद्र सेमवाल और दीपक राणा का कहना है कि इससे पहले भी बरसात में वहां पुलिया बही हैं, लेकिन कांवड़ यात्रा के समय कभी इस प्रकार से गोमुख मार्ग पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई गई। उन्होंने पार्क प्रशासन पर पुलिया बनाने में जानबूझ कर देरी करने का भी आरोप लगाया।

गंगोत्री नेशनल पार्क के उपनिदेशक आरएन पांडेय ने इस संबंध में पूछे जाने पर कहा कि हमारे मजदूर चीड़बासा में मौजूद हैं लेकिन जब तक उफनाए नालों में पानी का बहाव कम नहीं होता, तब तक निर्माण कार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इसलिए गोमुख न जाने के बोर्ड लगाए गए हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article