राजकोट महानगरपालिका ने फरवरी में हुए मेगा डिमोलिशन अभियान के दौरान हुए खर्च की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह फैसला उस समय लिया गया जब करीब ₹27 लाख के भोजन और नाश्ते के बिल तथा लाखों रुपये के पानी और अन्य खर्चों को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
जानकारी के अनुसार, 21 से 26 फरवरी के बीच चले डिमोलिशन अभियान में करीब 1,500 मकानों को हटाया गया था। इस पूरी कार्रवाई में पुलिस, नगर निगम के कर्मचारी, जेसीबी ऑपरेटर, मजदूर, वीडियोग्राफी टीम समेत लगभग 5,000 लोग तैनात थे।
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कार्रवाई के बाद कर्मचारियों के भोजन के लिए ₹27 लाख का बिल और पानी की आपूर्ति के दो अलग-अलग बिल, जिनकी कुल राशि करीब ₹18 से ₹19 लाख बताई गई, स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष मंजूरी के लिए रखे गए। हालांकि, स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन ने इन बिलों को मंजूरी देने से इनकार करते हुए जांच के आदेश दिए।
नगर निगम पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
विवाद का मुख्य कारण पानी की बोतलों की कीमत और उनकी संख्या को लेकर उठे सवाल हैं। बिल में प्रति बोतल ₹8 की दर से करीब 1.5 लाख पानी की बोतलों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा वीडियोग्राफी पर हुए खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मामला तूल पकड़ने पर विपक्ष ने नगर निगम पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए। इसके बाद मामला मेयर तक पहुंचा, जिन्होंने नगर निगम आयुक्त को पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए।
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जांच के लिए एक समिति गठित
नगर निगम आयुक्त ने जांच के लिए एक समिति गठित की है, जिसमें दो डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर, एक असिस्टेंट म्यूनिसिपल कमिश्नर, एक अकाउंटेंट और एक सिटी इंजीनियर शामिल हैं। समिति सभी बिलों की जांच करेगी और यह तय करेगी कि खर्च वास्तविक और नियमों के अनुरूप है या नहीं। जांच रिपोर्ट आने तक संबंधित बिलों पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा।
