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UP ब्यूरोक्रेसी में नया नियम; अब सांसदों-विधायकों को देखते ही उठना होगा, अधिकारियों को 'हाथ जोड़' करना होगा स्वागत

UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने अधिकारियों के लिए सांसदों और विधायकों के सम्मान को लेकर सख्त शासनादेश जारी किया है। अब फोन न उठाना और प्रोटोकॉल तोड़ना अधिकारियों को भारी पड़ेगा। साथ ही 9 मई को लोक अदालत की तैयारी के निर्देश दिए गए हैं।

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सांकेतिक चित्र

Lucknow: उत्तर प्रदेश में अब अफसरों की मनमानी नहीं चलेगी। राज्य सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सांसदों और विधायकों (जनप्रतिनिधियों) के सम्मान को लेकर बेहद सख्त प्रोटोकॉल लागू कर दिया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने गुरुवार को एक कड़ा शासनादेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि जनप्रतिनिधियों के प्रति अमर्यादित व्यवहार अब अधिकारियों को भारी पड़ेगा।

हाथ जोड़कर स्वागत और 'सत्कार' अनिवार्य

नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई सांसद या विधायक किसी सरकारी कार्यालय में आता है, तो संबंधित अधिकारी को अपनी सीट से उठकर उनका अभिवादन करना होगा। प्रोटोकॉल में 'हाथ जोड़कर सम्मान' करने और बैठने के लिए कहने के साथ-साथ पानी और शिष्टाचार पूछने के निर्देश भी शामिल हैं। यह कदम पिछले कई समय से मिल रही प्रोटोकॉल उल्लंघन की शिकायतों के बाद उठाया गया है।

फोन न उठाना पड़ेगा महंगा, देना होगा 'कॉल बैक'

शासनादेश में डिजिटल संवाद को लेकर भी कड़े नियम बनाए गए हैं। जनप्रतिनिधियों का फोन आने पर अधिकारियों को तत्काल उठाना होगा। यदि अधिकारी बैठक में है और फोन नहीं उठा पाता, तो उसे एक मैसेज भेजना होगा और बैठक खत्म होते ही 'यथाशीघ्र' कॉल बैक करना अनिवार्य होगा। सदस्यों द्वारा बताए गए प्रकरणों को केवल सुनना ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण तरीके से निस्तारण कर उसकी जानकारी भी देनी होगी। प्रोटोकॉल का पालन न करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ 'उप्र राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली' के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

9 मई को 'राष्ट्रीय लोक अदालत'

एक ओर जहां प्रोटोकॉल सख्त हुआ है, वहीं दूसरी ओर न्याय प्रक्रिया को तेज करने के लिए भी सरकार सक्रिय है। मुख्य सचिव ने 9 मई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों की समीक्षा की। डीएम को निर्देश दिए गए हैं कि अधिक से अधिक पुराने मुकदमों की पहचान कर उनका निस्तारण कराएं। बैंक रिकवरी, बिजली बिल कंपाउंडिंग और वाहन चालान (दिसंबर 2021 से लंबित) से जुड़े मामलों के त्वरित समाधान के निर्देश दिए गए हैं। लोक अदालत की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने के लिए आधुनिक तकनीक और आशा/आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का सहयोग लेने को कहा गया है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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