उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) से जुड़े मामलों को लेकर चुनाव आयोग का रुख किया है। सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल की ओर से मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश को ज्ञापन सौंपकर कई मामलों में जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
सपा का आरोप है कि मेरठ में कुछ बीएलओ को इसलिए स्थानांतरित किया गया, क्योंकि उन्होंने ऐप और ओटीपी से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने में असमर्थता जताई थी। पार्टी ने इस तरह के तबादलों पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई है कि चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची में गड़बड़ी की जा सकती है।
मेरठ में बीएलओ के तबादले पर सवाल
सपा की ओर से चुनाव आयोग को दिए गए ज्ञापन में मेरठ में बीएलओ के तबादले का मुद्दा उठाया गया है। पार्टी का आरोप है कि ऐप और OTP उपलब्ध नहीं कराने वाले बीएलओ का तबादला किया गया। सपा ने आयोग से पूरे मामले की जांच कराने और यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हो।तिलोई सीट पर डुप्लीकेट वोटरों का दावा
सपा ने अमेठी की तिलोई विधानसभा सीट की मतदाता सूची को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि यहां 2 हजार से अधिक डुप्लीकेट वोटर मौजूद हैं। पार्टी ने इन नामों का सत्यापन कराने और यदि जांच में डुप्लीकेट नाम पाए जाते हैं तो उन्हें नियमानुसार हटाने की मांग की है।
मेरठ शिक्षक सीट पर 5 हजार से ज्यादा फर्जी वोटर का आरोप
सपा ने मेरठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि यहां 5 हजार से अधिक फर्जी शिक्षक मतदाता जोड़े गए हैं।
सपा ने चुनाव आयोग से इन मतदाताओं के दस्तावेजों और पात्रता का सत्यापन कराने की मांग की है। गौरतलब है कि इससे पहले भी सपा की ओर से मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र में पांच हजार से अधिक डुप्लीकेट, फर्जी, अनुपस्थित, स्थानांतरित और लापता मतदाताओं के नाम होने का दावा करते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी से जांच की मांग की गई थी।
चुनाव आयोग से जांच और कार्रवाई की मांग
सपा ने अपने ज्ञापन में चुनाव आयोग से मतदाता सूची से जुड़े सभी आरोपों की जांच कराने और नियमों के मुताबिक कार्रवाई करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को दूर करना जरूरी है। हालांकि, सपा की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अंतिम रूप से किसी मतदाता का नाम फर्जी या डुप्लीकेट है या नहीं, यह संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगा।
