यूरोप के सुपरमार्केट इन दिनों एक अजीबोगरीब साइबर हमले का शिकार हो रहा है। हैकर सुपरमार्केट में लगे बड़े-बड़े फ्रीजर को अपना निशाना बना रहे हैं। हैकर इन फ्रीजर को एक्सेस कर मशीनों का तापमान बढ़ा दे रहे हैं, जिससे उनमें रखा दूध, मांस और अन्य खाद्य पदार्थ खराब हो जा रहा है। कई जगह मशीनों को भी नुकसान पहुंचा है। इन हमलों से एक ओर खाने-पीने के सामान का संकट बढ़ा है तो दूसरी ओर सुपरमार्केट कारोबार को लाखों यूरो का नुकसान होने की आशंका है। आइए जानते हैं कि न कैश काउंटर, न कंप्यूटर न ही कुछ और... हैकर आखिर सुपरमार्केट में लगे फ्रीजर को ही क्यों निशाना बना रहे हैं?
फ्रांस से हुई थी साइबर हमले की शुरुआत
सोमवार को यूरोप के कई देशों में सुपरमार्केट के कूलिंग सिस्टम प्रभावित हुए। इनमें बेल्जियम, लक्जमबर्ग, स्वीडन और आयरलैंड शामिल हैं। इस हमले में कई देशों में 100 से अधिक दुकानों के रेफ्रिजरेटर और फ्रीजर प्रभावित हुए। हालांकि, इन हमलों की शुरुआत पिछले महीने फ्रांस से हुई थी। वहां सैकड़ों सुपरमार्केट में कूलिंग सिस्टम प्रभावित हुए, जिसके कारण बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ खराब हो गए। अब ये हमले यूरोप के दूसरे देशों के साथ अमेरिका तक पहुंचने की खबरें आई हैं।
तापमान 70 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा दे रहे
हैकर्स ने कूलिंग यूनिट को डीफ्रॉस्ट मोड में डालकर तापमान बढ़ा दिया, जिससे दूध, मीट और अन्य खाद्य पदार्थ खराब हो गए और दुकानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। बेल्जियम के कुछ स्टोर में तापमान 70 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि आयरलैंड में 13 और स्वीडन में कई स्टोर प्रभावित हुए। इससे पहले 12 अक्टूबर को फ्रांस के सैकड़ों सुपरमार्केट में भी ऐसी घटनाएं हुई थीं।
हैकर फ्रीजर को ही क्यों निशाना बना रहे हैं?
इन हमलों के पीछे का असली मकसद अभी तक सामने नहीं आया है। हालांकि, यूरोपीय अधिकारियों को आशंका है कि यह खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को बाधित करने की एक सोची-समझी कोशिश हो सकती है। यूरोपीय संघ के कृषि और खाद्य मामलों के आयुक्त ने इन हमलों को खाद्य आपूर्ति बाधित करने और उपभोक्ताओं का भरोसा कमजोर करने की जानबूझकर की गई कोशिश बताया है।
भले ही फिलहाल खाद्य सुरक्षा पर कोई बड़ा खतरा नहीं बताया गया है, लेकिन भोजन की बर्बादी और कारोबारियों को नुकसान हुआ है। इस तरह के हमलों का असर केवल सुपरमार्केट तक सीमित नहीं रहता। जब बड़ी संख्या में दुकानों के कूलिंग सिस्टम बंद होते हैं, तो खाद्य पदार्थों की सप्लाई, स्टॉक और बिक्री प्रभावित होती है। इससे पूरी खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान पैदा हो सकता है।
फ्रीजर को कैसे निशाना बना रहे हैकर?
यूरोप के बड़े सुपरमार्केट में हजारों खाद्य उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक रेफ्रिजरेशन सिस्टम का इस्तेमाल होता है। इन मशीनों को इंटरनेट से जोड़कर एक केंद्रीय सिस्टम के जरिए नियंत्रित किया जाता है।
इस तकनीक के कई फायदे हैं:
- रियल टाइम मॉनिटरिंग: एक ही जगह बैठकर सैकड़ों दुकानों के फ्रीजर का तापमान देखा जा सकता है।
- दूर से कंट्रोल: तकनीशियन दुकान पर पहुंचे बिना तापमान और दूसरी सेटिंग बदल सकते हैं।
- खराबी का अलर्ट: मशीन में समस्या आने पर सिस्टम पहले ही अलर्ट दे सकता है।
- बिजली की बचत: जरूरत के हिसाब से कूलिंग सिस्टम को नियंत्रित किया जा सकता है।
- खाद्य पदार्थों की सुरक्षा: तापमान में बदलाव होने पर समय रहते कार्रवाई की जा सकती है।
लेकिन यही सुविधा साइबर हमलावरों के लिए कमजोरी बन गई है। हैकर इन मशीनों के कंट्रोल सिस्टम तक पहुंच कर हैक कर रहे हैं और दूर बैठे ही उनका तापमान बढ़ा दे रहे हैं, जिससे उसमें रखा खाने-पीने का सामान खराब हो जा रहा है। कुछ मामलों में यूरोपीय सुपरमार्केट के उपकरणों का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की खबरें हैं। इससे खाद्य पदार्थ पिघलने के साथ मशीनों को भी नुकसान पहुंचा।
इन हमलों के पीछे कौन है?
अभी तक किसी हैकर समूह या देश ने इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है। बेल्जियम के अभियोजक कार्यालय ने हालिया फ्रिज साइबर हमलों की आपराधिक जांच शुरू कर दी है।
दुनिया में बढ़ा साइबर हमलों का खतरा
आज सुपरमार्केट के फ्रीजर से लेकर बिजली व्यवस्था, परिवहन, अस्पताल और औद्योगिक मशीनें तक इंटरनेट से जुड़ रही हैं। इससे इनका संचालन आसान हुआ है, लेकिन साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ा है।
ऐसी मशीनों पर हमला होने का मतलब केवल डेटा चोरी या कंप्यूटर सिस्टम ठप होना नहीं है। हैकर अब डिजिटल सिस्टम में सेंध लगाकर वास्तविक दुनिया में मशीनों को बंद कर सकते हैं, तापमान बदल सकते हैं और जरूरी सेवाओं को बाधित कर सकते हैं।