देश की राजधानी दिल्ली में दिवाली की सुबह हवा की गुणवत्ता बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, रविवार की सुबह शहर का औसतन वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 384 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' (Very Poor) श्रेणी में आता है। राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में आबोहवा आपातकालीन स्थिति में पहुंच गई है। 6 बजे के अपडेट के अनुसार, दिल्ली के 23 प्रमुख मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 11 स्टेशनों पर AQI 400 के पार दर्ज किया गया, जो 'गंभीर' (Severe) श्रेणी को दर्शाता है।
पंजाबी बाग सबसे प्रदूषित
दिल्ली के अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद खतरनाक बनी हुई है, सर्वाधिक प्रदूषित इलाकों यानी जहां का AQI 400 से ऊपर है, उनकी सूची देखिए
- पंजाबी बाग: 450
- आरके पुरम: 449
- IIT दिल्ली: 446
- द्वारका: 444
- CRRI मथुरा रोड: 425
- सिरीफोर्ट, नॉर्थ कैंपस (DU) और चांदनी चौक: 423
- पूसा: 415
- बुराड़ी क्रॉसिंग: 411
- NSUT जाफरपुर: 409
अन्य प्रमुख इलाकों की स्थिति :
- नरेला (399)
- ITO (396)
- मंदिर मार्ग (393)
- उत्तम नगर (373)
- बुराड़ी (370)
- टॉकटोरा गार्डन और आया नगर (369)
- वसुंधरा एन्क्लेव (356)
- टिकरी कलां और बदरपुर (349)
- कराला (337)
- लोधी रोड (333)
मौसम, वाहनों के धुएं और पराली का तिहरा हमला
पर्यावरण और वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों, वाहनों के उत्सर्जन, दीवाली के उत्सव और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं के संयुक्त प्रभाव के कारण हवा लगातार जहरीली हो रही है। मौसम प्रणाली के अनुसार, हवा की गति 10 किमी/घंटा से कम रहने और वेंटिलेशन लेवल कम होने के कारण प्रदूषक तत्व वायुमंडल में ही फंसे रह गए हैं। शनिवार को दिल्ली की हवा में PM10 प्रमुख प्रदूषक तत्व रहा। दिल्ली सरकार के 'डिसीजन सपोर्ट सिस्टम' (DSS) के अनुसार, शनिवार को दिल्ली के कुल प्रदूषण में अकेले परिवहन क्षेत्र का योगदान 21.4% रहा, जो सबसे बड़ा कारण था। शुक्रवार को 6 राज्यों में पराली जलाने के 589 मामले दर्ज किए गए, जिनमें पंजाब में 357, मध्य प्रदेश में 139 और राजस्थान में 58 घटनाएं शामिल हैं। शनिवार को दिल्ली के प्रदूषण में पराली का योगदान 1.7% था, जिसके रविवार को बढ़कर 5.4% होने का अनुमान है। (15 सितंबर से 6 नवंबर के बीच कुल 6,226 पराली की घटनाएं दर्ज की गई हैं)।
पूरे दिल्ली-NCR में 'ग्रैप-3' की पाबंदियां लागू
दीवाली से पहले बिगड़ते हालात को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने शुक्रवार, 6 नवंबर से ही पूरे दिल्ली-एनसीआर में 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) का तीसरा चरण तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है। जिसके तहत धूल पैदा करने वाले सभी गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। स्टोन क्रशर और खनन गतिविधियों को बंद कर दिया गया है। दिल्ली और आसपास के जिलों (गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर) में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल के हल्के चार पहिया वाहनों के चलाने पर पाबंदी लगा दी गई है। कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए हाइब्रिड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) मोड में कक्षाएं चलाने का विकल्प दिया गया है। साथ ही, सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। लोगों से अपील की गई है कि वे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, कारपूलिंग अपनाएं, कोयला और लकड़ी जलाने से बचें और छोटी दूरियों के लिए पैदल या साइकिल का इस्तेमाल करें।
