Indian American Voters US Elections: अमेरिका में भारतीय मूल के मतदाताओं ने हाल में संपन्न चुनावों में विदेश नीति या भारत के प्रति अमेरिका के रुख के बजाय प्रमुख तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन की नीतियों से नाराज होकर रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ मतदान किया। अमेरिका में मतदान के रुझानों का गहन अध्ययन करने वाली विशेषज्ञ सुमित्रा बद्रीनाथन ने यह बात कही।
बद्रीनाथन ने 'पीटीआई' से एक साक्षात्कार में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की आव्रजन नीतियों के कारण चुनौतीपूर्ण माहौल होने के बावजूद भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक अब भी पढ़ाई और करियर बनाने के लिए यूरोपीय देशों की तुलना में अमेरिका को बेहतर मानते हैं।
'अमेरिकन यूनिवर्सिटी' में राजनीति विज्ञान की सहायक प्रोफेसर बद्रीनाथन ने कहा, 'हम भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों से लगातार पूछते रहे हैं कि क्या उनके लिए यह मायने रखता है कि उनके नेता भारत के प्रति क्या रुख अपनाते हैं। इसका जवाब हमेशा ’नहीं’ ही मिलता है।'
बद्रीनाथन ने 'कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस' में दक्षिण एशिया कार्यक्रम के निदेशक मिलन वैष्णव और अन्य लोगों के साथ मिलकर 'इंडियन अमेरिकन एटीट्यूड्स सर्वे' जारी किया। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य यह समझना है कि अमेरिका में भारतीय मूल के लोग चुनावी राजनीति को किस नजरिए से देखते हैं।
भारतीय मूल के कितने लोग जीते?
हाल में संपन्न मध्यावधि चुनावों में भारतीय मूल के छह अमेरिकी उम्मीदवार प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए, जबकि 30 से अधिक उम्मीदवारों ने राज्यों की विधानसभाओं और अन्य सार्वजनिक पदों के चुनावों में जीत हासिल की।
इन चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर अपना नियंत्रण खो दिया और डेमोक्रेटिक पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया। इसके साथ ही ट्रंप अपने कार्यकाल के अंतिम दो वर्ष के लिए ऐसे राष्ट्रपति बन गए हैं, जिनकी राजनीतिक ताकत काफी सीमित हो गई है।
ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई से लोगों में नाराजगी है और इसी वजह से उनकी पार्टी को चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, बद्रीनाथन ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए केवल महंगाई और तेल की ऊंची कीमतों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा।
उन्होंने कहा, 'हमने पाया कि भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के लिए भी वही मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, जो आम अमेरिकी नागरिकों के लिए हैं। वे रोजगार, अर्थव्यवस्था और जीवनयापन की लागत की बात करते हैं। संभव है कि इस बार एच-1बी वीजा, भेदभाव और ऐसे अन्य मुद्दों की भूमिका कुछ अधिक रही हो।'
अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य टेक्सास में चुनाव प्रचार के दौरान भारत विरोधी भावनाएं हावी रहीं। रिपब्लिकन नेता बो फ्रेंच की टेक्सास विश्वविद्यालय के छात्रों को निशाना बनाकर की गई टिप्पणियों पर राजनीतिक दलों की सीमाओं से परे व्यापक नाराजगी देखने को मिली।
बद्रीनाथन ने कहा, 'यह कहना मुश्किल है कि केवल बो फ्रेंच की सोशल मीडिया पोस्ट के कारण लोगों ने किसी खास पार्टी के पक्ष या विपक्ष में मतदान किया। इसके साथ ही आव्रजन नीतियों में वास्तविक बदलाव, आव्रजन को लेकर की गई बयानबाजी और अर्थव्यवस्था में ऐसे बदलाव भी हुए, जिनसे लोगों का जीवन मुश्किल हो गया। उस पोस्ट की भी संभवतः कुछ भूमिका रही होगी।'
उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों में आम तौर पर आव्रजन, शुल्क और एच-1बी वीजा से जुड़ी ट्रंप की कुछ नीतियों को लेकर काफी नकारात्मक राय है। बद्रीनाथन ने यह अनुमान लगाने से इनकार कर दिया कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल करने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी भारत के प्रति कैसी नीतियां अपनाएगी।
उन्होंने कहा, 'यह एक नए दौर की शुरुआत है। यह कहना बहुत मुश्किल है कि प्रतिनिधि सभा, सीनेट और कई राज्यों की विधानसभाओं में डेमोक्रेटिक पार्टी को मिला बहुमत नीतिगत फैसलों में तब्दील होगा या फिर राजनीतिक गतिरोध पैदा करेगा।' बद्रीनाथन ने कहा कि सख्त आव्रजन नीतियों और भारतीयों के साथ भेदभाव के बावजूद अमेरिका में पढ़ाई करने को लेकर लोगों की दिलचस्पी अब भी काफी अधिक है।
