बिजनेस

दिवाली गिफ्ट टैक्स नियम: कितने रुपये का गिफ्ट टैक्स के दायरे में आता है? समझें इनकम टैक्स के नियम

Diwali Gift Tax Rules 2026: दोस्तों से प्राप्त कितने रुपये के गिफ्ट टैक्स के दायरे में आते हैं। वहीं, रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट्स पर टैक्स के क्या नियम हैं।

Image

जानिए दिवाली गिफ्ट पर टैक्स नियम

Photo : iStock

Diwali Gift Tax Rules 2026 : देशभर में दिवाली का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। दिवाली खुशियों और अपनों के साथ उपहार साझा करने का सबसे बड़ा अवसर होती है। इस मौके पर लोग अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और सहकर्मियों को कैश, वाउचर या महंगे गिफ्ट्स देते हैं। हालांकि, त्योहार की खुशी में अक्सर लोग टैक्स से जुड़ी पेचीदगियों को अनदेखा कर देते हैं। अगर आप भी अपने दोस्तों, परिवार या कंपनी से दिवाली का कोई कीमती तोहफा प्राप्त कर रहे हैं, तो इसके आयकर (Income Tax) से जुड़े नियमों को जानना बेहद जरूरी है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर दोस्तों से मिला गिफ्ट 50,000 रुपये से ज्यादा का है, तो क्या सिर्फ अतिरिक्त राशि पर टैक्स लगेगा या पूरी रकम टैक्सेबल होगी? टैक्स का यह गणित इस बात पर निर्भर करता है कि तोहफा किसने दिया है और वित्त वर्ष में कुल कितने मूल्य के उपहार मिले हैं।

दोस्तों से मिले गिफ्ट पर इनकम टैक्स के नियम

आयकर अधिनियम के नियमों के अनुसार, दोस्तों या गैर-रिश्तेदारों से मिलने वाले उपहारों के लिए सालभर में 50,000 रुपये की छूट सीमा तय की गई है। हालांकि, सबसे ध्यान देने योग्य बात यह है कि जैसे ही गैर-रिश्तेदारों से मिले कुल उपहारों का मूल्य 50,000 रुपये से ऊपर जाता है, पूरी रकम टैक्स के दायरे में आ जाती है, न कि केवल 50,000 रुपये से ऊपर की अतिरिक्त राशि।

रिश्तेदारों से प्राप्त गिफ्ट्स पूरी तरह टैक्स-फ्री

आयकर कानून में 'रिश्तेदारों' की एक स्पष्ट परिभाषा तय की गई है, जिसमें माता-पिता, भाई-बहन, पति या पत्नी और बच्चे शामिल हैं। कानून के तहत निर्दिष्ट रिश्तेदारों से मिलने वाले उपहारों पर कोई मौद्रिक सीमा लागू नहीं होती है। अगर आपके माता-पिता या कोई अन्य निकट संबंधी आपको दिवाली पर कितनी भी बड़ी राशि या महंगा सामान उपहार में देता है, तो वह राशि पूरी तरह से कर-मुक्त (Tax-Free) रहती है। इसके लिए आपको कोई अतिरिक्त टैक्स चुकाने की आवश्यकता नहीं होती।

एम्प्लॉयर (कंपनी) से मिलने वाले दिवाली बोनस और गिफ्ट्स

नौकरीपेशा लोगों को अपनी कंपनी या एम्प्लॉयर से मिलने वाले दिवाली गिफ्ट्स के नियम सामान्य उपहारों से अलग होते हैं। अगर आपकी कंपनी आपको नकद (Cash) या कैश-इक्विवेलेंट (जैसे चेक या बैंक ट्रांसफर) में उपहार देती है, तो वह पूरी राशि आपकी सैलरी का हिस्सा मानी जाएगी और उस पर पूरा टैक्स लगेगा।

दूसरी ओर, नए आयकर नियमों के तहत अगर कंपनी द्वारा नॉन-कैश (इन-काइंड) वस्तुएं, वाउचर या गिफ्ट टोकन दिए जाते हैं, तो एक वित्तीय वर्ष में 15,000 रुपये तक के उपहार कर-मुक्त होते हैं। हालांकि, अगर नॉन-कैश गिफ्ट या वाउचर की कुल वैल्यू 15,000 रुपये या उससे अधिक हो जाती है, तो पूरी वैल्यू को सैलरी परक्विसिट मानकर टैक्स के दायरे में शामिल किया जाता है।

दिवाली उपहार लेते और देते समय इन बातों का रखें ध्यान

त्योहारों के सीजन में उपहारों का आदान-प्रदान करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि टैक्स डिपार्टमेंट केवल दिवाली के दिनों का हिसाब नहीं देखता, बल्कि पूरे वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के उपहारों को एक साथ जोड़ता है। इसलिए, गैर-रिश्तेदारों से मिलने वाले सभी छोटे-बड़े गिफ्ट्स का सही रिकॉर्ड रखना चाहिए। अगर आपको कोई बड़ा या महंगा गिफ्ट मिला है, तो इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय सही वित्तीय परामर्श लें ताकि आपको किसी भी तरह का कानूनी या टैक्स नोटिस न झेलना पड़े। सही वित्तीय योजना के साथ दिवाली की खुशियां दोगुनी की जा सकती हैं।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article