केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सड़क संपर्क को मजबूत बनाने के लिए दो महत्वपूर्ण सुरंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट ने लगभग 9,800 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इन परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र के बीच 12 महीने आवाजाही बनी रहेगी, साथ ही चिनाब घाटी तक पहुंचना भी बेहद आसान हो जाएगा।
कौन-कौन सी 2 सुरंगें बनेंगी?
यह पूरी परियोजना अनंतनाग-चेनानी कॉरिडोर का हिस्सा है, जिसके तहत नेशनल हाईवे-244 (NH-244) पर सिंहपोरा-वैलू सुरंग और सुधमहादेव-द्रंगा टनल बनाई जाएंगी। परियोजना के तहत सिंहपोरा-वैलू मार्ग पर लगभग 39 किलोमीटर लंबे हिस्से का विकास किया जाएगा, जिसमें करीब 10 किलोमीटर लंबी एकतरफा दोहरी सुरंग बनाई जाएगी। वहीं, सुधमहादेव-द्रंगा मार्ग के 13 किलोमीटर हिस्से में करीब 8 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण होगा। इन दोनों परियोजनाओं को केंद्र सरकार के 100% बजट से तैयार किया जाएगा और इसे अगले 5 सालों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
हर मौसम में मिलेगा सड़क संपर्क
इन सुरंगों का निर्माण ऐसे क्षेत्रों में किया जा रहा है, जहां सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी, भूस्खलन और खराब मौसम के कारण सड़कें अक्सर बंद हो जाती हैं। जिससे कई इलाके कट जाते हैं। लेकिन नई सुरंगें बनने के बाद इन बाधाओं से काफी हद तक राहत मिलेगी और सर्दियों में भी रास्ते कभी बंद नहीं होंगे।
इन जिलों को होगा सबसे ज्यादा फायदा
इस परियोजना से डोडा, किश्तवाड़ और उधमपुर जिलों की सड़क कनेक्टिविटी पहले से बेहतर होगी। साथ ही जम्मू से कश्मीर और चिनाब घाटी के बीच यात्रा का समय भी घट जाएगा। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी आसान और सुरक्षित होगी।
पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से चिनाब घाटी में पर्यटन, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। साथ ही दूरदराज के इलाकों तक जरूरी सामान और आपातकालीन सेवाएं भी तेजी से पहुंच सकेंगी।
बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
ये दोनों सुरंग परियोजनाएं केंद्र सरकार की जम्मू-कश्मीर में आधुनिक सड़क नेटवर्क विकसित करने की योजना का हिस्सा हैं। इससे पहले भी सरकार चेनानी-नाशरी टनल, जोजिला टनल और जेड-मोड़ टनल जैसी कई बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रही है, ताकि सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में हर मौसम में बेहतर सड़क संपर्क सुनिश्चित किया जा सके।
