इंदौर : मध्यप्रदेश में रेलवे की महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना का मार्ग प्रशस्त करने के लिए घने जंगलों से होकर गुजरने वाले एक मार्गखंड में करीब 1.40 लाख पेड़ काटे जाने को केंद्र सरकार ने कुछ शर्तों के साथ अंतिम मंजूरी दे दी है और कटाई मॉनसून का मौसम बीतने के बाद शुरू होगी। अधिकारियों ने बताया कि इस अहम परियोजना के तहत रेलवे की ऐतिहासिक छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदला जा रहा है।
वन मंडलाधिकारी (DFO) लाल सुधाकर सिंह ने ’पीटीआई/भाषा’ को बताया कि महू-खंडवा रेल लाइन के गेज परिवर्तन की परियोजना के लिए इंदौर और खरगोन जिलों के वन क्षेत्रों में करीब 1.40 लाख पेड़ काटे जाएंगे। डीएफओ के मुताबिक इनमें इंदौर जिले के लगभग 1.24 लाख पेड़ शामिल हैं। उन्होंने बताया कि हमें केंद्र सरकार से पेड़ कटाई की अंतिम अनुमति मिल चुकी है। हालांकि, कटाई का काम मॉनसून का मौसम बीतने पर अक्टूबर से शुरू होगा।
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सिंह ने बताया कि जिस वन क्षेत्र में रेलवे का काम शुरू होगा, उसी क्रम में वहां पेड़ों की कटाई की जाएगी और इसके लिए रेलवे तथा वन विभाग मिलकर योजना तैयार कर रहे हैं। डीएफओ ने बताया कि वन विभाग ने महू-खंडवा रेल परियोजना के लिए रेलवे पर हरित गलियारा प्रबंधन योजना लागू करने की शर्त भी लगाई है।
उन्होंने बताया कि इस शर्त के तहत रेलवे को पटरियों के किनारे स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने होंगे और परियोजना क्षेत्र के भीतर एवं इसके आस-पास उपलब्ध खाली भूमि पर भी पौधरोपण करना होगा। डीएफओ ने बताया कि शर्त के तहत रेलवे को पटरियों के पास वर्षा जल संचयन के ढांचे विकसित करने होंगे और परियोजना के संचालन में ऊर्जा दक्षता के उपाय भी अपनाने होंगे।
सिंह ने कहा कि हरित रेलवे गलियारा प्रबंधन योजना लागू होने से पर्यावरण संरक्षण के साथ ही वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में मदद मिलेगी। इस योजना का खर्च रेलवे द्वारा उठाया जाएगा और वन विभाग इनकी निगरानी करेगा। उन्होंने कहा कि वन विभाग ने पेड़ों की कटाई से वन्य जीवन, मिट्टी और नमी पर होने वाले दुष्प्रभावों को कम करने की योजना अपने स्तर पर बनाई है।
अधिकारियों ने बताया कि महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना के महू-सनावद खंड में इंदौर जिले का 404 हेक्टेयर और खरगोन जिले का 46 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। पेड़ कटाई से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए इसके दोगुने क्षेत्र में पौधे रोपे जाएंगे।
यहां रोपे जाएंगे पौधे
अधिकारियों के मुताबिक इंदौर जिले में पौधारोपण के लिए सीमित जमीन उपलब्ध है, इसलिए धार और झाबुआ जिलों के वन मंडलों में 916 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधे रोपे जाएंगे। हर हेक्टेयर में 1,000 पौधे रोपे जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना के तहत 156 किलोमीटर लंबी बड़ी रेल लाइन बिछाई जा रही है, जबकि देश की आजादी से पहले रियासत काल में बिछाई गई छोटी लाइन की लंबाई 118 किलोमीटर थी। उन्होंने बताया कि गेज परिवर्तन परियोजना का काम 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। महू-खंडवा के बीच नये रेल मार्ग के कारण मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर और देश की आर्थिक राजधानी के रूप में मशहूर मुंबई के बीच की दूरी कम हो जाएगी तथा पश्चिमी मध्यप्रदेश का दक्षिण भारत से भी संपर्क मजबूत होगा।
