देश में लगातार एक्सप्रेसवे का जाल बिछाया जा रहा है। देश का सबसे लंबा दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे, समृद्धि एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे इसके उदाहरण हैं। एक्सप्रेसवे से शहरों की दूरियां कम होती हैं और सफर में समय भी कम लगता है। लेकिन देश में एक ऐसा एक्सप्रेसवे भी बनाया जा रहा है, जो दो बड़े महानगरों की दूरी को 320 किमी तक कम कर देगा। जिस एक्सप्रेसवे की हम यहां बात कर रहे हैं वह देश के दूसरे सबसे बड़े इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बाद यह इकोनॉमिक कॉरिडोर दूसरे नंबर पर आता है।
इस एक्सप्रेसवे का नाम क्या है?
जिस इकोनॉमिक कॉरिडोर की हम यहां बात कर रहे हैं, वह 1271 किमी लंबा सूरत-चेन्नई इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-150C) है। इसमें 38.2 किमी लंबा 6 लेन का वह हिस्सा भी है, जो जुलेखाली गांव को आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले से जोड़ेगा। खासतौर पर हम यहां 1271 किमी लंबे इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के सूरत-कुरनूल एक्सप्रेसवे की बात कर रहे हैं।
किन महानगरों की दूरी 320 किमी कम होगी
देश में तेजी से विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे नेटवर्क के बीच केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित सूरत-कुरनूल एक्सप्रेसवे के बनकर तैयार हो जाने से राजधानी दिल्ली और चेन्नई के बीच की दूरी लगभग 320 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद दोनों महानगरों के बीच यात्रा पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तेज और आसान हो जाएगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार 11 मार्च को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान इस महत्वपूर्ण परियोजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह ग्रीनफील्ड सूरत-कुरनूल एक्सप्रेसवे न सिर्फ दूरी कम करेगा, बल्कि यात्रा का समय और माल परिवहन की लागत भी काफी हद तक घटाएगा।
इन शहरों को जोड़ेगा एक्सप्रेसवे
बता दें कि सूरत-कुरनूल एक्सप्रेसवे गुजरात के प्रमुख औद्योगिक शहर सूरत से शुरू होकर महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों जैसे नासिक, अहमदनगर और सोलापुर से होते हुए आंध्र प्रदेश के कुरनूल तक पहुंचेगा। इसके बाद यह दक्षिण भारत के कई बड़े शहरों जैसे चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि और कन्याकुमारी को भी कनेक्टिविटी देगा।
एक्सप्रेसवे से इन क्षेत्रों को होगा फायदा
सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस एक्सप्रेसवे से देश के कई महत्वपूर्ण व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र सीधे आपस में जुड़ जाएंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा ट्रांसपोर्ट सेक्टर को होगा, क्योंकि खाद्य पदार्थ, कच्चा माल और तैयार उत्पाद लेकर जाने वाले ट्रक कम समय में बाजार तक पहुंच पाएंगे। इससे लॉजिस्टिक्स कॉस्ट भी कम होगी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
यहां जाम से मुक्ति दिलाएगा एक्सप्रेसवे
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि फिलहाल उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाले कई प्रमुख हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव काफी ज्यादा है। खासतौर पर पुणे और कोल्हापुर के बीच का मार्ग राष्ट्रीय सड़क नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां ट्रकों, बसों और कारों की भारी आवाजाही के कारण अक्सर जाम जैसी स्थिति बनी रहती है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का काम कहां तक पहुंचा
नया सूरत-कुरनूल एक्सप्रेसवे इस भीड़भाड़ वाले मार्ग के एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आएगा। इससे पुणे और कोल्हापुर जैसे शहरों और आसपास के क्षेत्रों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहनों को एक नया और तेज विकल्प मिल जाएगा। नितिन गडकरी ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को ऐतिहासिक परियोजना बताते हुए कहा कि इसका 70 से 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है, देश में सड़क नेटवर्क को इतना बेहतर बनाया जाए कि लोग काम, व्यापार और पर्यटन के लिए लंबी दूरी की यात्रा कम समय में कर सकें।
