'कुत्तों से वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट लेकर चलने को क्यों नहीं कह सकते?' जानें सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?
- Reported by: गौरव श्रीवास्तवEdited by: Digpal Singh
- Updated Jan 20, 2026, 04:53 PM IST
आवारा कुत्तों के मामले में आज मंगलवार 20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने जहां आवारा कुत्तों के मुद्दे पर अपनी बात रखी, वहीं वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने आवारा कुत्तों के वैक्सीनेशन का मुद्दा उठाया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी रोचक प्रतिक्रिया दी। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।
सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर सुनवाई, अगली तारीख 28 जनवरी
सुप्रीम कोर्ट में आज आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई हुई। आज यानी मंगलवार 20 जनवरी को कुत्तों के स्टरिलाइजेशन या वैक्सीनेशन पर भी बात हुई। इस दौरान जब वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने जब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर प्रश्न उठाया तो कोर्ट ने कहा कि हमने कुत्ता काटने पर उन्हें खाना खिलाने वाले जिम्मेदारी वाली टिप्पणी व्यंग्य में नहीं बल्कि बहुत गंभीरता से कही। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।
सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जिस इलाके में मैं रहता हं, वहां बहुत ज्यादा आवारा कुत्ते हैं, वे पूरी रात एक-दूसरे का पीछा करते रहते हैं। मुझे नींद की बीमारी है। मेरे बच्चे पढ़ नहीं पाते। मैंने अधिकारियों से शिकायत की। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ वैक्सीनेशन और स्टेरिलाइजेशन कर सकते हैं। मैंने NHRC को भी लिखा, कुछ नहीं हुआ।
BNS में कुत्तों हो हटाने का नियम!
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, ABC नियम एक खास दायरे में काम करते हैं। कुत्तों को स्टेरिलाइजेशन या वैक्सीनेशन के लिए ले जाने पर उन्हें वापस छोड़ा जाएगा। लेकिन BNS कहता है कि अगर परेशानी हो रही है, तो स्थानीय अधिकारी कुत्तों को हटा सकते हैं।
स्टरिलाइजेशन से आक्रामकता कम होती है
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि यह बात दुनियाभर में मानी गई है कि आपके पास नसबंदी का एक असरदार सिस्टम होना चाहिए... हालांकि, ये नसबंदी सिस्टम जयपुर, गोवा वगैरह में काम कर चुके हैं। लेकिन ज़्यादातर शहरों में यह नसबंदी सिस्टम काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्टेरिलाइजेशन से कुत्तों की आक्रामकता कम होती है। समस्या यह है कि बहुत सारे शहरों में असरदार स्टेरिलाइजेशन नहीं हो रहा है। इसे असरदार बनाने का तरीका है, इसे पारदर्शी बनाना और लोगों को जवाबदेह बनाना।
स्टरिलाइजेशन का रिकॉर्ड रखा जाए
प्रशांत भूषण ने कहा कि एक ऐसा सिस्टम होना चाहिए, जहां लोग उन आवारा कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें जो स्टेरिलाइज्ड नहीं हैं। इसे किसी वेबसाइट पर रिकॉर्ड या रिपोर्ट किया जाना चाहिए। कुछ खास अथॉरिटी होनी चाहिए जिनकी जम्मेदारी बिना स्टेरिलाइज्ड आवारा कुत्तों की शिकायत पर कार्रवाई करना होगा।
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व्यंग्य नहीं, हमारी टिप्पणी बहुत गंभीर
प्रशांत भूषण के इस सुझाव पर जस्टिस मेहता ने कहा कि हम कुत्तों से खुद सर्टिफिकेट लेकर चलने के लिए क्यों नहीं कह सकते? इस पर प्रशांत भूषण ने कहा कि कभी-कभी कोर्ट की टिप्पणियों से बुरे मैसेज जाते हैं। उदाहरण के लिए इसी कोर्ट ने कहा कि कुत्तों के काटने के लिए फीडर्स को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.. शायद यह एक व्यंग्य था। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि हमने यह व्यंग्य में नहीं कहा था। हमने यह बहुत गंभीरता से कहा था।
आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में अब सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई बुधवार 28 जनवरी को होंगी। इस मामले पर अभी तक कोर्ट ने एनिमल राइट एक्टिविस्ट, विभिन्न NGO की ओर से पेश वकीलों की दलीलों को सुना है। 28 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई में कोर्ट एमिकस क्यूरी, NHRC और केंद्र व राज्यों की ओर से पेश वकीलों की दलीलें सुनेगी।
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