हरियाणा के सोनीपत से रिश्तों के खोखलेपन और आधुनिक समाज की कड़वी सच्चाई को उजागर करने वाली एक बेहद भावुक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्ग पिता अपनी बेटियों से एक बार मिलने की आस दिल में लिए दुनिया से चले गए लेकिन अफसोस, जिन बेटियों के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया, उनके पास पिता के अंतिम दर्शन तक का समय नहीं था।
मृतक बुजुर्ग की पहचान महाराष्ट्र के रहने वाले शिवचरण रतन गुप्ता के रूप में हुई है। शिवचरण कभी कपड़े के एक बड़े व्यापारी हुआ करते थे। उनका कोई बेटा नहीं था, इसलिए उन्होंने अपनी तीन बेटियों को बड़े लाड-प्यार से पाला, अच्छी शिक्षा दी और उन्हें काबिल बनाया। उनकी दो बेटियां आज सरकारी शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। लगभग डेढ़ साल पहले शिवचरण अपनी पत्नी मीना गुप्ता के साथ सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में आकर रहने लगे थे।
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बेटियों से मिलने की तड़प में ली अंतिम सांस
वृद्धाश्रम के संचालकों के अनुसार, शिवचरण पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और बार-बार अपनी बेटियों से मिलने की इच्छा जता रहे थे। आखिरकार बेटियों से मिलने की तड़प में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। आश्रम प्रबंधन ने तुरंत उनकी मौत की खबर बेटियों को दी, यह सोचकर कि आखिरी वक्त में बेटियां अपने पिता का चेहरा देखने जरूर पहुंचेंगी।
बेटियों ने मोबाइल स्क्रीन पर दी पिता को अंतिम विदाई
लेकिन जो जवाब मिला उसने सभी को सन्न कर दिया। बड़ी बेटी अनीता ने समय की कमी और मजबूरी का हवाला देते हुए आने से मना कर दिया। उसने अंतिम संस्कार के खर्च के लिए संस्था को ऑनलाइन 5100 रुपये भेजे और कहा कि पिता का अंतिम संस्कार आप लोग ही कर दें और उसकी वीडियो कॉल के जरिए उन्हें अंतिम दर्शन करा दिए जाएं। आखिरकार एक समाजसेवी संस्था ने ही लावारिस की तरह उनका अंतिम संस्कार किया और बेटियों ने मोबाइल स्क्रीन पर ही अपने पिता को अंतिम विदाई दी।
