Satadhar Dham Biogas Plant: गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल सताधार धाम अब आस्था के साथ-साथ आत्मनिर्भर ऊर्जा का भी एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। संत आपा गीगा से जुड़ा यह पवित्र स्थल अपनी संध्या आरती के लिए तो पहले से ही प्रसिद्ध है, लेकिन अब यहां स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग ने इसे एक नई पहचान दी है। धाम परिसर में राज्य का सबसे अधिक क्षमता वाला बायोगैस संयंत्र संचालित हो रहा है। वर्तमान में यहां प्रतिदिन 85 घनमीटर क्षमता के चार बायोगैस प्लांट काम कर रहे हैं, जबकि इसी क्षमता के दो और संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन संयंत्रों के जरिए न सिर्फ ऊर्जा उत्पादन हो रहा है, बल्कि धाम पूरी तरह से रसोई संचालन में आत्मनिर्भर बन चुका है।
10 हजार श्रद्धालुओं को कराया जाता है सात्विक भोजन
सताधार धाम में करीब एक हजार गायों की देखभाल की जाती है। यहां संचालित विशाल अन्नक्षेत्र में प्रतिदिन औसतन 10 हजार श्रद्धालुओं को सात्विक भोजन कराया जाता है। इस रसोई के लिए पूरी तरह बायोगैस का इस्तेमाल होता है, जिसके लिए रोजाना लगभग 8 हजार किलो गोबर का उपयोग किया जाता है। पहले जहां खाना बनाने के लिए 800 से 900 किलो लकड़ी या फिर 10 से 15 गैस सिलेंडर प्रतिदिन खर्च होते थे, वहीं अब यह व्यवस्था पूरी तरह स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित हो चुकी है।
महंत विजयबापू ने कहा ये
धाम के महंत विजयबापू के अनुसार, संस्था अब खाना पकाने के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर है और केवल बायोगैस का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा, बायोगैस संयंत्र से निकलने वाली स्लरी को जैविक खाद के रूप में खेती में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कृषि गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है। इस पहल को गुजरात ऊर्जा विकास निगम (GEDA) की ‘संस्थागत बायोगैस प्लांट योजना’ के तहत सहायता मिली है। गुजरात सरकार की इस योजना के जरिए गौशालाओं, पिंजरापोलों, शैक्षणिक संस्थानों और ट्रस्टों को बायोगैस संयंत्र लगाने के लिए सब्सिडी दी जाती है।
गैर-लाभकारी संस्थाओं को 50 प्रतिशत तक का अनुदान
इसी के साथ, जैविक कचरे और कृषि अवशेषों को एनेरोबिक प्रक्रिया से बायोगैस में बदलकर सस्ती और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा तैयार की जाती है, जबकि इससे मिलने वाली स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोगी साबित होती है। इस योजना के अंतर्गत 25, 35, 45, 60 और 85 घनमीटर क्षमता वाले संयंत्र के लिए सहायता दी जाती है। राज्य सरकार द्वारा इस योजना के तहत 25 से 85 घनमीटर क्षमता तक के संयंत्रों पर सहायता दी जाती है, जिसमें गैर-लाभकारी संस्थाओं को 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है। इसका उद्देश्य संस्थाओं को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और टिकाऊ विकास को प्रोत्साहित करना है।
2026-27 में 60 नए संयंत्र लगाने की योजना
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए संस्थागत बायोगैस योजना के तहत कुल 12 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जिनमें से लगभग 60 संस्थागत बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। इस योजना के कार्यान्वयन के लिए वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 15 एजेंसियों को सूचीबद्ध किया गया है। पिछले पांच वर्षों (2021-22 से 2025-26) के दौरान राज्य में 193 संस्थाओं में कुल 13,955 घनमीटर दैनिक क्षमता के बायोगैस प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं, वर्ष 2026-27 के लिए भी 12 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिसके तहत 60 नए संयंत्र लगाने की योजना है।
