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नक्सलवाद के गढ़ में लोकतंत्र की दस्तक: बस्तर के 41 गांवों में पहली बार मनाया गया गणतंत्र दिवस; गूंजा जन गण मन...

बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के इन गांवों में आज पहली बार तिरंगा फहराया गया और स्थानीय ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक समारोह में भाग लिया। जिन इलाकों में कभी राष्ट्रीय पर्व मनाना जोखिम भरा माना जाता था, वहां आज लोग स्वयं आगे बढ़कर लोकतांत्रिक आयोजनों में शामिल हुए।

बस्तर के 41 गांवों में पहली बार मनाया गया गणतंत्र दिवस।

बस्तर के 41 गांवों में पहली बार मनाया गया गणतंत्र दिवस।

जहां कभी बंदूक की धमक और भय का सन्नाटा पसरा रहता था, वहां आज ‘जन गण मन’ गूंज उठा। दशकों तक नक्सलवाद के साए में रहे छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के 41 गांवों में 26 जनवरी 2026 लोकतंत्र की नई सुबह लेकर आया। बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा के उन दूरस्थ इलाकों में, जहां कभी तिरंगा फहराना जोखिम भरा माना जाता था, वहां आज पहली बार गणतंत्र दिवस पूरे सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया।

इन गांवों में यह सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व का आयोजन नहीं, बल्कि डर से आजादी और लोकतांत्रिक पुनर्जन्म का प्रतीक बन गया। जब आज वहां गणतंत्र दिवस का उत्सव मनाया जा रहा था तो ग्रामीणों की आंखों में उत्साह था, बच्चों के हाथों में तिरंगा था। बस्तर के इतिहास में आज का दिन उस बदलाव का गवाह बना, जहां हिंसा के अतीत से निकलकर क्षेत्र ने शांति, संविधान और विकास की राह को अपनाया।

बीते दो सालों में बदले हैं हालात

पिछले दो वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति, सुरक्षाबलों की सतत कार्रवाई और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से बस्तर में हालात तेजी से बदले हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 59 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिससे प्रशासन की स्थायी मौजूदगी सुनिश्चित हुई है। इन्हीं प्रयासों के चलते बीते वर्ष 53 गांवों में गणतंत्र दिवस मनाया गया था, जबकि इस वर्ष 47 नए गांव इस परंपरा से जुड़े।

पहली बार फहराया गया तिरंगा

बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के इन गांवों में आज पहली बार तिरंगा फहराया गया और स्थानीय ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक समारोह में भाग लिया। जिन इलाकों में कभी राष्ट्रीय पर्व मनाना जोखिम भरा माना जाता था, वहां आज लोग स्वयं आगे बढ़कर लोकतांत्रिक आयोजनों में शामिल हुए।

मनाया गया गणतंत्र दिवस

मनाया गया गणतंत्र दिवस

सुरक्षा के साथ हो रहा विकास

बस्तर क्षेत्र में अब 100 से अधिक सुरक्षा कैंप स्थापित हो चुके हैं, जिनकी मौजूदगी ने सुरक्षा के साथ-साथ विकास का रास्ता भी खोला है। सड़कों, स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं, संचार और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं धीरे-धीरे दूरस्थ गांवों तक पहुंच रही हैं। हाल ही में जगरगुंडा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बैंकिंग सेवाओं की पुनः शुरुआत इसी बदलाव का संकेत है।

सीएम साय बोले- मुख्यधारा से जुड़ रहा बस्तर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अनुसार, बस्तर को अब हिंसा के अतीत से निकालकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर में शांति, विश्वास और लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। 26 जनवरी 2026 को इन 47 गांवों में फहराया गया तिरंगा शांति, लोकतंत्र और विकास की नई शुरुआत का प्रतीक बन गया है।

पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कही थी ये बात

इससे पहले, बीते दिन बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया था कि इन 41 गांवों में से 13 गांव बीजापुर, 18 नारायणपुर और 10 सुकमा जिले में स्थित हैं। उन्होंने कहा था कि बस्तर मंडल के 41 गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। यह बदलाव सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई और स्थानीय समुदाय के सहयोग से संभव हो पाया है।”

सुंदरराज ने कहा कि हाल के महीनों में इन इलाकों में सुरक्षा शिविरों की स्थापना से लोगों में विश्वास, सुशासन और प्रशासन से जुड़ाव की भावना मजबूत हुई है। साथ ही, अबूझमाड़ और राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्रों में शीर्ष माओवादी कैडरों जैसे बसवराजू, के. रामचंद्र रेड्डी, सुधाकर और कट्टा सत्यनारायण रेड्डी को निष्क्रिय किए जाने से उग्रवाद का असर काफी हद तक कमजोर हुआ है।

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शिव शुक्ला
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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