Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य के अलग-अलग जिले और अस्पताल जरूर बदल रहे हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं की असमय मौत का खौफनाक आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों से सामने आए प्रसूताओं की मौत के नए मामलों के बाद पूरे राज्य के चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया है।
स्वास्थ्य मंत्री का आया बयान
इस गंभीर संकट के बीच 'टाइम्स नाउ नवभारत' ने राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से बातचीत की। मंत्री ने कहा, "मैंने स्थिति की समीक्षा के लिए कोटा, जोधपुर, बीकानेर सहित सभी जगहों के मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल्स और हॉस्पिटल सुप्रीटेंडेंट्स की एक आपात बैठक बुलाई है। मैं खुद जमीनी हकीकत का जायजा लेने भीलवाड़ा और बांसवाड़ा का दौरा करूंगा।"
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मौत की वजह बनी रहस्य
जब मंत्री से लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि किसी को सजा तब दी जा सकती है जब कोई पुख्ता सबूत हो। फिलहाल मौतों का सटीक कारण पकड़ में नहीं आ रहा है। मंत्री ने दावा किया कि ये मौतें क्लस्टर में हो रही हैं, जो विभाग के लिए एक रहस्य बनी हुई है। खींवसर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉक्टरों का बचाव किया और कहा कि राजस्थान में मातृ मृत्यु दर (MMR) प्रति एक लाख सुरक्षित डिलीवरी पर 48 से नीचे है। यह दर देश की राष्ट्रीय औसत मृत्यु दर से काफी कम है।
वहीं कोटा में भी गर्भवती महिलाओं की मौत मामले में सामने आने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अस्पताल पहुंचे और हालात का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने स्थिति पर चिंता जताते हुए पीड़ित परिवारों की मदद का भी ऐलान किया।
