Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के अस्तित्व और उसके पर्यावरण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक बेहद बड़ा और सख्त कदम उठाया है। NGT ने गोमती नदी के किनारों और बाढ़ क्षेत्र में हो रहे कथित अवैध निर्माण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा आदेश जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि गोमती नदी के किनारे 'गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016' का उल्लंघन कर कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही NGT ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और बाकी जिम्मेदार पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की बेंच का अंतरिम आदेश
NGT के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने यह अंतरिम निर्देश उस याचिका पर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एलडीए द्वारा गोमती नदी के बिल्कुल करीब, उसके रिवरबेड और फ्लडप्लेन के भीतर बांध (एम्बैकमेंट), एक चार लेन की सड़क और कई बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि चूंकि गोमती नदी, गंगा की एक सहायक नदी है, इसलिए इस पर 2016 का गंगा संरक्षण ढांचा पूरी तरह लागू होता है। ऐसी किसी भी गतिविधि के लिए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
तस्वीरों ने खोली पोल, नियमों का हुआ उल्लंघन
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने सबूत के तौर पर कई तस्वीरें पेश कीं, जिनमें साफ दिख रहा था कि नियमों की अनदेखी कर गोमती नदी के किनारे धड़ल्ले से निर्माण कार्य चल रहा था।
NGT ने 2016 के आदेश का हवाला देते हुए नोट किया कि गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारों और फ्लडप्लेन को पूरी तरह 'निर्माण-मुक्त' रखना अनिवार्य है। नदी में या उसके सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में किसी भी स्थायी या अस्थायी ढांचे के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध है और पुल, संबंधित सड़कों या बांधों के निर्माण के लिए NMCG की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।
अगली सुनवाई 25 अगस्त को
याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने जनवरी 2026 में NMCG से शिकायत की थी, जिसके बाद NMCG ने लखनऊ के जिला मजिस्ट्रेट, जिला गंगा समिति के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भी लिखा था। इसके बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका।
अब NGT ने सख्त रुख अपनाते हुए अंतरिम रोक लगा दी है। चूंकि गोमती नदी के फ्लडप्लेन के सीमांकन का एक अलग मामला पहले से ही लंबित है, इसलिए ट्रिब्यूनल ने इस नए मामले को भी उसी के साथ जोड़ते हुए अगली सुनवाई 25 अगस्त को तय की है।
