India Trade Deficit June 2026 : भारत का व्यापार घाटा जून 2026 में बढ़कर 30.43 अरब डॉलर पहुंच गया। मई में यह 28.21 अरब डॉलर था। यानी एक महीने में ही घाटा करीब 2.2 अरब डॉलर बढ़ गया। इसकी बड़ी वजह आयात का निर्यात के मुकाबले ज्यादा रहना और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक व्यापार पर छाया अनिश्चितता का माहौल है। जून के दौरान भारत का कुल निर्यात 40.41 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 70.84 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे दोनों के बीच का अंतर बढ़ गया और व्यापार घाटा अनुमान से भी ज्यादा निकला। बाजार को करीब 26.5 अरब डॉलर के घाटे की उम्मीद थी।
क्या होता है व्यापार घाटा और क्यों बढ़ा?
जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से ज्यादा होता है तो दोनों के बीच का अंतर व्यापार घाटा कहलाता है। जून में भारत ने विदेशों से ज्यादा सामान खरीदा, जबकि निर्यात अपेक्षाकृत कम रहा। इसी वजह से व्यापार घाटा बढ़ गया। हालांकि, मई की तुलना में जून में निर्यात और आयात दोनों में कुछ कमी आई, लेकिन आयात का स्तर अब भी काफी ऊंचा रहा, जिससे घाटा बढ़ गया।
किन क्षेत्रों ने बढ़ाया भारत का निर्यात?
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक जून में कई क्षेत्रों ने अच्छा प्रदर्शन किया। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, चावल, लौह अयस्क, हस्तशिल्प,
मांस और डेयरी उत्पाद और समुद्री उत्पाद में अच्छी मांग के कारण निर्यात को सहारा मिला है, लेकिन यह आयात के मुकाबले पर्याप्त नहीं रहा।
होर्मुज संकट बढ़ा रहा चिंता
भारत के व्यापार पर इस समय सबसे बड़ा बाहरी जोखिम पश्चिम एशिया का तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने फिर से होर्मुज संकट ने चिंता बढ़ा दी है। दुनिया के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। अगर यहां किसी तरह की बाधा आती है तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और शिपिंग लागत भी महंगी हो सकती है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें फिर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।
यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो भारत का आयात बिल और बढ़ सकता है, जिससे व्यापार घाटा भी और बढ़ने का खतरा रहेगा।
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर क्या स्थिति है?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच समझौते का ढांचा तैयार है और उचित समय पर उस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। हालांकि, भारत फिलहाल अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 10 प्रतिशत शुल्क का सामना कर रहा है। यह व्यवस्था 24 जुलाई तक लागू है। यदि तब तक समझौता नहीं हुआ तो भारतीय उत्पादों पर और अधिक शुल्क लगने की आशंका बनी हुई है। ऐसी स्थिति में भारत के निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है और आने वाले महीनों में व्यापार घाटा और बढ़ने का जोखिम रहेगा।
विदेशी निवेश ने दी राहत
व्यापार घाटा बढ़ने के बीच एक सकारात्मक संकेत विदेशी निवेश से मिला है। अप्रैल 2026 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़कर 15.29 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि इससे पहले यह 6.63 अरब डॉलर था। इससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक निवेशकों का भारत पर भरोसा बना हुआ है।
