सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने सोमवार को कहा कि व्हाट्सऐप समेत अन्य मंचों ने ’यूजरनेम फीचर’ पर भेजे गए नोटिस का जवाब दे दिया है। सरकार जवाब पर गौर करने के बाद इस मुद्दे पर अपना रुख बताएगी।
सरकार के विवादित ’यूजरनेम फीचर’ पर नोटिस जारी किए जाने के बाद तीन मंच...व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और सिग्नल नियामकीय जांच के दायरे में आ गए हैं। यह विशेषता असल में लोगों को अपना फोन नंबर साझा किए बिना संदेश भेजने, प्राप्त करने के मंच पर बातचीत करने की सुविधा देती है।
7-10 दिन का दिया गया था समय
पीटीआई/भाषा के मुताबिक कृष्णन ने संवाददाताओं से कहा, ’’यूजरनेम के मुद्दे पर, कुछ मंच के जवाब मिल गए हैं। हम उसकी जांच कर रहे हैं और अपना रुख बताएंगे।’’ कृष्णन ने बताया कि मंच को जवाब देने के लिए 7-10 दिन का समय दिया गया था। उन्होंने कहा, ’’इसलिए हमें भी उन जवाब की जांच करने के लिए कुछ समय चाहिए।’’
सरकार ने एक जुलाई को व्हाट्सऐप को नोटिस जारी कर मेटा के स्वामित्व वाले इस मंच से प्रस्तावित यूजरनेम फीचर के बारे में सवाल पूछे थे। केंद्र सरकार ने चिंता जताई थी कि यह किसी और का रूप धारण कर धोखाधड़ी और ऑनलाइन घोटाले को बढ़ावा दे सकता है। इसको देखते हुए प्रौद्योगिकी कंपनी को नोटिस दिया गया है।
सरकार ने व्हाट्सऐप को निर्देश दिया था कि जब तक इस मुद्दे पर ’सरकार की संतुष्टि के अनुसार’ बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह ’यूजरनेम फीचर’ पेश न करे। व्हाट्सऐप को नोटिस भेजने के बाद, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजे।
इनमें उनके मौजूदा ’यूजरनेम फीचर’ पर सवाल उठाए गए और पूछा गया कि मंच धोखाधड़ी और किसी और का रूप धरकर धोखाधड़ी करने के जोखिमों से जुड़ी चिंताओं को कैसे दूर कर रहे हैं। भारत में व्हाट्सऐप के लगभग 50 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। वहीं टेलीग्राम की पहुंच उससे बहुत कम है।
