रायपुर

अब 24 घंटे खुली रहेंगी दुकानें, इस राज्य की सरकार का बड़ा फैसला; क्या शराब की दुकानों पर भी लागू होगा ये नियम?

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में अब दुकानें 24 घंटे खुली रहेंगी। राज्य सरकार ने ये फैसला लिया है। इस कदम से न केवल व्यापारियों को फायदा होगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। अधिकारियों ने बताया कि इस निर्णय से राज्य में व्यापार करने में आसानी होगी और छोटे व्यापारियों को विशेष लाभ मिलेगा।

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छत्तीसगढ़ में सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे दुकानें खुली रह सकती हैं।

Now shops will remain open 24 hours: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना (नियोजन एवं सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 2017 और नियम 2021 को लागू कर दिया है। राज्य सरकार के इस फैसले के बाद व्यापारी अब अपनी दुकानें सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे खुली रख सकेंगे। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे खुली रह सकती है दुकानें

अधिकारियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार ने व्यापार को बढ़ावा देने तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए दुकानें और प्रतिष्ठान अधिनियम लागू किया है। सरकार के इस फैसले से व्यापारी अब अपनी दुकानें सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे खुली रख सकेंगे। इस कदम से न केवल व्यापारियों को फायदा होगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

उन्होंने बताया कि पहले दुकानों को सप्ताह में एक दिन बंद रखना पड़ता था, लेकिन अब व्यापारियों को अपनी सुविधा के अनुसार काम करने की छूट मिल गई है।

नए नियम में दुकानों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को बनाया सरल

अधिकारियों ने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश मिलेगा और किसी भी कर्मचारी से प्रतिदिन आठ घंटे से अधिक काम नहीं कराया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, सभी दुकान मालिकों को श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए श्रमिक कल्याण योजनाओं का पालन करना होगा।

अधिकारियों ने बताया कि नए नियम में दुकानों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को भी सरल बना दिया गया है और मौजूदा पंजीकृत दुकानों को बिना किसी अतिरिक्त लागत के छह महीने के भीतर श्रमिक पहचान संख्या प्राप्त करनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि आवेदन निर्धारित अवधि के बाद जमा किया जाता है, तो नियमों के अनुसार शुल्क लागू होगा।

शराब की दुकानों पर लागू नहीं होगा यह नियम

अधिकारियों ने बताया कि इस निर्णय से राज्य में व्यापार करने में आसानी होगी और छोटे व्यापारियों को विशेष लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि दुकान संचालन में अधिक लचीलापन होने से व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी आएगी जिससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी लेकिन यह नियम शराब की दुकानों पर लागू नहीं होगा।

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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