प्रयागराज

अतीक अहमद को सड़क के रास्ते लाया जाएगा प्रयागराज, साबरमती जेल पहुंची UP Police

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 26, 2023, 01:29 PM IST

उत्तर प्रदेश पुलिस रविवार को साबरमती जेल पहुंची है। माना जा रहा है कि पुलिस सड़क के रास्ते माफिया अतीक अहमद को प्रयागराज ला सकती है। अतीक 2019 से साबरमती जेल में बंद है।

Atiq Ahmed: उमेशपाल हत्याकांड की जांच कर रही यूपी पुलिस रविवार को गुजरात के साबरमती जेल पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि यहां जेल में बंद माफिया अतीक अहमद को सड़क के रास्ते प्रयागराज लाया जाएगा, जहां उससे उमेश पाल केस के सिलसिले में पूछताछ होगी। बता दें, इस मामले में अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ दोनों आरोपी हैं। अशरफ इन दिनों बरेली जेल में बंद है।

अभी तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश पुलिस माफिया अतीक के साथ करीब 24 से 25 घंटे की यात्रा करेगी। उसे झांसी के रास्ते लाया जाएगा। दूसरी तरफ अशरफ को भी बरेली जेल से प्रयागराज लाया जा सकता है।

उमेश पाल अपहरण मामले में सुनवाई पूरी

जानकारी के मुताबिक, उमेश पाल अपहरण मामले में कोर्ट की सुनवाई पूरी हो चुकी है। इस मामले में फैसला आना है। इसी सिलसिले में अतीक और अशरफ को कोर्ट में पेश किया जाना है। दूसरी तरफ, उमेश पाल की हत्या के सिलसिले में भी अतीक को गिरफ्तार किया जा सकता है। ट्रांसफर वारंट पर अतीक को उत्तर प्रदेश लाने की चर्चा है।

2019 से साबरमती जेल में बंद है अतीक

माफिया अतीक अहमद को जून 2019 में गुजरात की साबरमती जेल में शिफ्ट किया गया था। उस पर व्यवसायी मोहित जायसवाल के अपहरण और हमले की साजिश रचने का आरोप था। इसके अलावा भी अतीक पर हत्या, अपहरण जैसे कई मामले दर्ज हैं। बता दें, बीते शुक्रवार को पुलिस की ओर से गुजरात की जेलों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया था।

पुलिस की पकड़ से दूर असद और शूटर

बता दें, बीते महीने 24 फरवरी को प्रयागराज में उमेश पाल की हत्या कर दी गई थी। उमेश पाल को उसके घर के बाहर बदमाशों ने गोली मार दी थी। इसके कई वीडियो भी सामने आए थे। इस मामले में अतीक अहमद का बेटा असद और शार्प शूटर पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। मामले में पुलिस ने कई गिरफ्तारियां की हैं।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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