प्रयागराज

Mahakumbh: 'अल्कलाइन वाटर से भी बेहतर 'महाकुंभ में गंगा जल....' पद्मश्री प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. सोनकर ने Lab में किया साबित

Ganga Water is Better than Alkaline Water: 'अल्कलाइन वाटर से भी बेहतर गंगा जल' महाकुंभ में गंगा जल की शुद्धता को लेकर पद्मश्री प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. सोनकर ने प्रयोगशाला में साबित किया है।

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प्रसिद्ध वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. अजय कुमार सोनकर के हवाले से महाकुंभ में गंगा जल की शुद्धता के बारे में 'संदेह को दूर' करने का प्रयास

Ganga Water is Better than Alkaline Water: उत्तर प्रदेश सरकार ने बृहस्पतिवार यानी 20 फरवरी को एक विज्ञप्ति जारी कर एक वैज्ञानिक के हवाले से महाकुंभ में गंगा जल की शुद्धता के बारे में 'संदेह को दूर' करने का प्रयास किया और कहा कि नदी का पानी 'क्षारीय जल की तरह' (Alkaline Water) शुद्ध है। उत्तर प्रदेश सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 13 जनवरी से प्रयागराज में जारी महाकुंभ में अब तक 58 करोड़ से अधिक लोगों ने गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम त्रिवेणी संगम के जल में डुबकी लगाई है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के संदर्भ में यह विज्ञप्ति जारी की है, जिसमें महाकुंभ में गंगा जल की गुणवत्ता पर संदेह जताया गया था।सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है, 'प्रसिद्ध वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. अजय कुमार सोनकर ने संशयवादियों को चुनौती दी है और वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ गंगा की पवित्रता के बारे में संदेह को खारिज किया है।'

उत्तर प्रदेश सरकार की विज्ञप्ति में कहा गया है कि डॉ. सोनकर ने महाकुंभ नगर के संगम नोज और अरैल समेत पांच प्रमुख स्नान घाटों से पानी के नमूने एकत्र किए। विज्ञप्ति में कहा गया है, 'इसके बाद इन नमूनों की प्रयोगशाला में सूक्ष्म जांच की गई। उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि करोड़ों श्रद्धालुओं के नदी में स्नान करने के बावजूद, पानी में न तो बैक्टीरिया की वृद्धि हुई और न ही पानी के पीएच स्तर में कोई गिरावट आई।'

सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, डॉ. सोनकर के शोध से पता चला है कि गंगा जल में 1,100 प्रकार के प्राकृतिक वायरस 'बैक्टीरियोफेज' होते हैं जो हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करते हैं।

जल की गुणवत्ता पर विवाद उस समय शुरू हुआ जब सीपीसीबी की एक रिपोर्ट में कहा गया कि 13 जनवरी को जब महाकुंभ शुरू हुआ तो संगम पर नदी के जल की जैविक ऑक्सीजन मांग (BOD) 3.94 मिलीग्राम प्रति लीटर थी। सीपीसीबी के अनुसार मकर संक्रांति (14 जनवरी) को यह सुधरकर 2.28 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गई और 15 जनवरी को और घटकर 1 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गई। हालांकि, 24 जनवरी को यह बढ़कर 4.08 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गई और मौनी अमावस्या (29 जनवरी) को यह 3.26 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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