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इससे बड़ा पाप क्या होगा? बीमार मां को घर में बंद किया, पत्नी और बच्चों के साथ महाकुंभ गया बेटा

Ramgarh News: मान्यता है कि महाकुंभ में स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है। मगर अपनी मां को प्रताड़ित करके भला किस व्यक्ति के पाप धुलते हैं और पुण्य हासिल होते हैं? झारखंड के रामगढ़ से ऐसी ही बीमार मां को घर में बंद कर पत्नी और बच्चों के साथ बेटा महाकुंभ गया।

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महाकुंभ। (File Photo)

Photo : PTI

Jharkhand: झारखंड के रामगढ़ जिले में एक व्यक्ति ने अपनी बीमार मां को कथित तौर पर घर में बंद कर दिया और पत्नी, बच्चों तथा ससुराल वालों के साथ महाकुंभ में स्नान के लिए प्रयागराज चला गया। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बुधवार को रामगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत सुभाष नगर कॉलोनी में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के एक क्वार्टर से 65 वर्षीय महिला को मुक्त कराया।

सोमवार घर में बंद थी और चूड़ा खाकर जिंदा थी महिला

पुलिस ने बताया कि महिला सोमवार से घर में बंद थी और चूड़ा खाकर जिंदा थी। पड़ोसियों को उसके बारे में तब पता चला जब वह भूख के कारण सहायता के लिए चिल्लाने लगी। रामगढ़ के उप-संभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) परमेश्वर प्रसाद ने कहा कि बुजुर्ग महिला की पहचान संजू देवी के रूप में हुई है। उन्होंने कहा, 'संजू देवी को उसके बेटे अखिलेश कुमार ने सोमवार से अपने सीसीएल क्वार्टर में बंद कर दिया था। कुमार अपने परिवार के साथ प्रयागराज में महाकुंभ देखने गया था। बुधवार को उनकी (संजू देवी की) बेटी द्वारा पुलिस को सूचित करने के बाद उन्हें बचाया गया।' उन्होंने कहा कि कुमार सीसीएल कर्मचारी है।

पुलिस ने ताला तोड़कर बचाया, पड़ोसियों ने तुरंत खाना खिलाया

एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि कुमार ने पुलिस को जानकारी दी कि उसकी मां की तबीयत खराब है और वे उसके खाने-पीने का सारा इंतजाम करके प्रयागराज गए थे। महिला की बेटी चांदनी देवी, जो कहुबेरा में सीसीएल क्वार्टर से लगभग पांच किलोमीटर दूर रहती है, ने कहा कि उसे पड़ोसियों से फोन पर मां के बारे में जानकारी मिली।

देवी ने संवाददाताओं को बताया, 'पुलिस ने ताला तोड़कर उसे बचाया। पड़ोसियों ने तुरंत उसे खाना दिया। उसे दवाइयां भी दी गईं और सीसीएल अस्पताल में भर्ती कराया गया।' देवी ने बताया कि उसके भाई अखिलेश कुमार को अनुकंपा के आधार पर सीसीएल में नौकरी मिली थी और वह रामगढ़ जिले में सीसीएल के अरगडा क्षेत्र में काम करता है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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