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रिश्वतखोर दारोगा: बरेली में रंगे हाथों नोटों की गड्डी लेते पकड़ा गया चौकी प्रभारी; हुआ बुरा हाल

यूपी पुलिस अपनी किसी न किसी हरकत की वजह से किरकिरी झेलती रहती है। अब बरेली के शीशगढ़ की पुलिस चौकी बंजरिया के प्रभारी जितेंद्र सिंह 20 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़े गए हैं।

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बरेली में रिश्वतखोर दारोगा गिरफ्तार

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

बरेली: उत्तर प्रदेश पुलिस के भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) की टीम ने बरेली जिले के थाना शीशगढ़ की पुलिस चौकी बंजरिया के प्रभारी जितेंद्र सिंह को शनिवार को दस हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। भ्रष्टाचार निवारण संगठन-बरेली मंडल के पुलिस उपाधीक्षक यशपाल सिंह ने बताया कि जिले के शीशगढ़ थाना क्षेत्र के लालू नगला में रहने वाले हामिद अली ने अवगत कराया था कि उसके भाई के विरुद्ध एक शिकायत हुई थी, जिसके निस्तारण के लिए बंजरिया पुलिस चौकी के प्रभारी जितेंद्र सिंह ने 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी, लेकिन उसने रिश्वत नहीं दी।

दारोगा ने इस काम के लिए मांगी रिश्वत

उपाधीक्षक सिंह के अनुसार चौकी प्रभारी ने नाराज होकर 12 जून को हामिद अली के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर दी। इस मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगाने के लिए चौकी प्रभारी सिंह ने दस हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। हामिद अली ने एसीओ में इसकी शिकायत की।

रिश्वत लेते हुए रंगे गिरफ्तार

पुलिस अधिकारी ने बताया कि हामिद अली की शिकायत का संज्ञान लेते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन की बरेली टीम ने एक रणनीति के तहत शनिवार को अपराह्न में चौकी प्रभारी जितेंद्र सिंह को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ चौकी में ही गिरफ्तार कर लिया। उन्‍होंने बताया कि जिले के भोजीपुरा थाना में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपी चौकी प्रभारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

(इनपुट-भाषा)

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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