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गोरखपुर में रिटायर्ड एयरफोर्सकर्मी का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे में किया रेस्क्यू; किडनैपर ने मांगी थी 1 करोड़ की फिरौती

सीएम सिटी गोरखपुर से किडनैप किए गए रिटायर्ड एयरफोर्सकर्मी अशोक जायसवाल को पुलिस ने सकुशल बरामद कर परिजनों को सौंप दिया है। किडनैपर ने 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी।

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गोरखपुर में रिटायर्ड एयरफोर्सकर्मी का अपहरण

गोरखपुर : घर स्वीमिंग के लिए निकले लापता रिटायर्ड एयरफोर्सकर्मी को पुलिस ने 12 घंटे के भीतर बरामद कर लिया है। जानकारी के मुताबिक, उन्हें किडनैप किया गया था। पुलिस ने तीन अपहरणकर्ताओं को भी गिरफ्तार कर लिया है। वारदात की जानकारी तब हुई, जब किडनैपर ने 1 करोड़ रुपये की फिरौती के लिए परिजनों को कॉल की। परिजनों ने ये सूचना स्थानीय पुलिस को दी। पुलिस ने तुरंत 6 टीमों का गठन कर जांच शुरू की और महज 12 घंटे के अंदर अशोक जायसवाल को सकुशल बरामद कर उनके परिजनों को सुपुर्द कर दिया।

पुलिस ने सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज के जरिए अपहरणकर्ताओं तक पहुंची थी। फिलहाल, अपहरण के आरोपी करुणेश दुबे, श्यामसुंदर और जनार्दन गौड़ को गिरफ्तार कर लिया गया और उनसे पूछताछ की जा रही है। आज दोपहर 3 बजे पुलिस पूरे घटनाक्रम का खुलासा करेगी।

दरअसल, 25 जुलाई की सुबह शाहपुर पुलिस को सूचना मिली सुबह 5.30 बजे पादरी बाजार के रहने वाले अशोक जायसवाल स्विमिंग करने के लिए घर से निकले और लापता हो गए। सुबह 10.30 बजे उनकी पत्नी के मोबाइल पर कॉल आया कि उनका अपहरण कर लिया गया है और उनको छोड़ने के बदले 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई। जानकारी यह भी है कि अशोक जायसवाल का किसी से रुपयों के लेन-देन का विवाद चल रहा था।

सूचना के बाद पुलिस ने सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर उनकी सकुशल बरामदगी के लिए 6 टीमों का गठन किया और उन्हें बरामद कर लिया। वारदात को अंजाम देने के लिए प्रयोग की गई एक गाड़ी भी जब्त की गई है। तीनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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