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मध्य प्रदेश में OBC को नहीं मिलेगा 27% आरक्षण! 14% पर ही करना पड़ेगा संतोष? हाई कोर्ट ने खारिज कीं याचिकाएं

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ओबीसी जातियों को 27 फीसदी आरक्षण देने की मांग वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। प्रदेश में 14 फीसदी आरक्षण ही लागू रहेगा। कोर्ट ने 27 फीसदी आरक्षण के आधार पर 2 सितंबर 2019 से 29 सितंबर 2022 तक हुई भर्तियों को सुरक्षित रखा है।

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(सांकेतिक फोटो-Istock)

जबलपुर : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 फीसदी आरक्षण देने की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने से इनकार करते हुए इससे संबंधित सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इसके साथ ही प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14 फीसदी ही रहेगा।

जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डबल बेंच ने इस मामले में 159 पेज का विस्तृत आदेश जारी किया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पूरे मामले में ऐसी कोई असामान्य और आपात स्थिति नहीं है, जिसके आधार पर आरक्षण की 50 फीसदी की सीमा को पार किया जा सके।

27 फीसदी आरक्षण के आधार पर हुई कुछ भर्तियों को राहत

हाई कोर्ट ने 2 सितंबर 2019 से 29 सितंबर 2022 तक 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के आधार पर हुई भर्तियों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। वहीं, जिन 13 फीसदी पदों को होल्ड पर रखा गया था, उन्हें अनारक्षित वर्ग से भरने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश में ओबीसी आरक्षण और लंबित भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों पर असर पड़ने की संभावना है।

दस्तावेजों और आंकड़ों का परीक्षण

मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दस्तावेजों, सारणियों और सांख्यिकी का परीक्षण किया। उन्होंने बताया कि कोर्ट के विस्तृत आदेश का अध्ययन किया जा रहा है और उसके बाद उसकी समीक्षा की जा रही है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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