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इस तरह शौचालय में सफर करके Olympic मेडल जीतेंगे खिलाड़ी! शर्मसार कर देगा ये VIDEO

जी नहीं, ये कोई अपराधी नहीं है, जो मुंह छिपा रहे हैं। ये खिलाड़ी हैं, जो भविष्य में देश का नाम रोशन करके देश के लिए मेडल लाने का सपना देख रहे हैं। लेकिन हम उनके साथ क्या कर रहे हैं? उन्हें ट्रेन की टॉयलेट में सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है। खिलाड़ियों के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद शर्मनाक है।

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नेशनल स्कूल चैंपियनशिप में शामिल होने के लिए ट्रेन की टॉयलेट में सफर करने को मजबूर खिलाड़ी

'पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे होओगे खराब...' ये कहावत पिछली सदी में हमारे देश के लगभग हर घर में दोहराई गई है। लेकिन चिंताजनक और शर्मनाक बात ये है कि आज भी खेल-कूद को वो इज्जत नहीं मिली है, जो उसे मिलनी चाहिए। कुछ खेलों को छोड़ दें तो आज भी देश में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के हालात खराब ही हैं। इसके अलावा उन खेलों को खेलने वाले खिलाड़ियों की दुर्दशा की खबरें भी खूब आती रहती हैं। ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है, जो खेलों और खिलाड़ियों के प्रति हमारे रवैये को दर्शाता है। ये वीडियो देखकर आपको गुस्सा आना चाहिए और अगर नहीं आता है तो आप आज भी पिछली सदी में ही जी रहे हैं।

नेशनल स्कूल चैंपियनशिप के लिए यूपी आए थे खिलाड़ी

उत्तर प्रदेश में आयोजित 69वीं राष्ट्रीय स्कूल कुश्ती चैंपियनशिप में भाग लेने वाले ओडिशा के 18 खिलाड़ियों के साथ जो हुआ वह काफी तकलीफदेह है। ओडिशा के कम से कम 18 एथलीटों को राज्य के स्कूल और जन शिक्षा विभाग की कथित लापरवाही के कारण ट्रेन के शौचालयों में अमानवीय परिस्थितियों में यात्रा करनी पड़ी। बात आम लोगों की हो तो कुछ और है, लेकिन जब सरकारी विभाग भी इस तरह की लापरवाही बरते तो यह गलती नहीं गुनाह कहलाएगी।

8 लड़कियां भी थीं शामिल

ओडिशा राज्य शिक्षा एवं जन शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में 10 लड़कों और 8 लड़कियों सहित कुल 18 खिलाड़ियों को उत्तर प्रदेश भेजा गया था। टिकट कंफर्म न होने के कारण, इन युवा खिलाड़ियों को कड़ाके की ठंड में ट्रेन के शौचालयों के पास स्थित सामान्य डिब्बों में ही यात्रा करने को मजबूर होना पड़ा। प्रश्न ये है कि जब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता थी तो शिक्षा विभाग ने खिलाड़ियों की यात्रा के लिए उचित प्रबंध क्यों नहीं किए। क्यों उन्हें टिकट कंफर्म न होने पर भेड़-बकरियों की तरह सफर करने को मजबूर होना पड़ा।

विडंबना ये है कि खिलाड़ियों को उसी दयनीय हालत में वापस भी लौटना पड़ा। क्योंकि वापसी की यात्रा के लिए भी उनका कोई कंफर्म टिकट नहीं था। खिलाड़ियों का इस तरह यात्रा करने का वीडियो वायरल हो गया है, जिससे ओडिशा के लोगों में ही नहीं बल्कि खेल प्रेमियों में भी भारी आक्रोश है। ट्रेन के शौचालयों के पास बैठे खिलाड़ियों के वीडियो ने जहां उन खिलाड़ियों के जज्बे को बयां किया है, वहीं सरकारी व्यवस्था पर भी प्रश्न उठाए हैं। इस वीडियो ने राष्ट्रीय स्तर पर ओडिशा का प्रतिनिधित्व करने वाले युवा खिलाड़ियों की सुरक्षा, गरिमा और भलाई के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

कल को जब इन्हीं में से कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतकर आएगा तो तमाम सरकारें इन्हें ईनाम देकर अपना पीआर करने में पीछे नहीं रहेंगी। लेकिन आज जब उन्हें सपोर्ट की जरूरत है, तब उन्हें इस तरह शौचालय में सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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