Pilibhit Voter List: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने सख्त कार्रवाई की है। आयोग ने 127-पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के दो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही दोनों अधिकारियों और VRC कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ पहले से दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 198 जोड़ने को कहा है।
निर्वाचन आयोग ने 31 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे पत्र में ये निर्देश दिए हैं। आयोग ने पीलीभीत के पांच सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) की भूमिका पर भी तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है। साथ ही जिले की सभी चार विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट भेजने को कहा है।
निलंबित अधिकारी आयोग की मंजूरी के बिना बहाल नहीं होंगे
आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोनों अधिकारियों के आरोपपत्र आयोग को जांच के लिए भेजे जाएं। आयोग की पूर्व अनुमति के बिना इन अधिकारियों को दोबारा सेवा में बहाल नहीं किया जा सकेगा। आयोग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को अदालत में गंभीरता से आगे बढ़ाने का भी निर्देश दिया है, ताकि मामले को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जा सके।
पांच AERO की भूमिका पर तीन दिन में रिपोर्ट
निर्वाचन आयोग ने VRC कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। इसके साथ ही 127-पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में तैनात पांच AERO की भूमिका की जांच कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
यूपी के सभी जिलों में वोटर लिस्ट की दोबारा जांच के आदेश
पीलीभीत की घटना के बाद आयोग ने उत्तर प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को अपने-अपने क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की पूरी तरह दोबारा जांच करने का निर्देश दिया है। खास तौर पर फॉर्म 6, 7 और 8 के जरिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने को कहा गया है।
आयोग ने पीलीभीत जिले की चारों विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की जांच एक सप्ताह में पूरी कर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। वहीं पांच AERO की भूमिका और VRC ऑपरेटर के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट तीन दिन में मांगी गई है।
क्या है BNS की धारा 198?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 198 उस लोक सेवक से संबंधित है, जो कानून के निर्देश की जानबूझकर अवज्ञा करता है और ऐसा करके किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने का इरादा रखता है या उसे नुकसान होने की जानकारी रखता है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर एक साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
