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गरीबी पर भारत का बड़ा वार: विश्व बैंक ने माना- 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, पीएम मोदी बोले- हमने जो ठाण लिया, वो कर दिखाया

India Poverty Decline: विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, 2011 से 2023 के दौरान भारत में 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देश का ऐतिहासिक बदलाव और मजबूत संकल्प बताया।

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भारत में गरीबी में आई ऐतिहासिक गिरावट: पीएम मोदी ने विश्व बैंक की रिपोर्ट की तारीफ की (तस्वीर-istock/X)

India Poverty Decline : भारत में गरीबी को लेकर एक बेहद सकारात्मक और राहत देने वाली खबर सामने आई है। विश्व बैंक (World Bank) की एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने दुनिया में सबसे तेजी से गरीबी घटाने वाले देशों में अपना नाम दर्ज कराया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व बैंक की इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए देश में गरीबी में आई इस ‘ऐतिहासिक’ गिरावट की जमकर सराहना की है। प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि को केवल एक आंकड़े के रूप में नहीं, बल्कि भारत में अवसरों के विस्तार और एक बड़े बदलाव के प्रतीक के रूप में देखा है।

इंस्टाग्राम पर साझा किया खास संदेश और प्रेरणादायक गीत

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक विशेष पोस्ट साझा की। इस पोस्ट की खास बात यह थी कि इसके बैकग्राउंड में वर्ष 2022 की बॉलीवुड फिल्म ‘दसवीं’ का लोकप्रिय और प्रेरणादायक गीत ‘ठान लिया’ बज रहा था। यह गीत सुखविंदर सिंह और तनिष्का सांघवी द्वारा गाया गया है, जो दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और बाधाओं को पार करने का संदेश देता है। फिल्म ‘दसवीं’ (जिसमें अभिषेक बच्चन और यामी गौतम मुख्य भूमिका में थे) की कहानी एक ऐसे नेता पर आधारित है जो जेल में रहकर 10वीं की परीक्षा पास करने का फैसला करता है। प्रधानमंत्री ने इस गीत के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि कठिन से कठिन चुनौतियों के बावजूद अगर इरादे मजबूत हों, तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

'गरीबी हटाओ' केवल नारा नहीं, बल्कि संकल्प: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने अपने बयान में विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने दशकों पुराने कांग्रेस के ‘गरीबी हटाओ’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार के लिए गरीबी उन्मूलन केवल एक चुनावी नारा नहीं था, बल्कि यह एक दृढ़ संकल्प (कमिटमेंट) रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सही नीतियों, नीयत और पारदर्शी योजनाओं के बल पर ही देश से गरीबी को इस स्तर तक कम किया जा सका है। सरकार के निरंतर प्रयासों से देश का एक बहुत बड़ा वर्ग भुखमरी और अत्यधिक गरीबी के जाल से बाहर निकलने में सफल रहा है।

2011 से 2023 के बीच 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए

विश्व बैंक की रिपोर्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2011 से 2023 के बीच देश के करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। यह आंकड़ा भारत की आबादी के एक बहुत बड़े हिस्से के जीवन स्तर में आए सुधार को दर्शाता है। इस अवधि के दौरान देश में अत्यधिक गरीबी की दर में 90 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पहले जहां हर चार में से एक से अधिक भारतीय अत्यधिक गरीबी में जीने को मजबूर था, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर करीब 38 में से केवल एक भारतीय रह गया है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि भारत ने गरीबी के खिलाफ अपनी लड़ाई में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है।

6 वर्षों में रोजगार के अवसरों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

गरीबी घटने के साथ-साथ देश में रोजगार के नए अवसरों का भी बड़े पैमाने पर सृजन हुआ है। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक प्रधानमंत्री ने बताया कि महज छह वर्षों के भीतर देश में रोजगार के अवसरों में 13.4 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आंकड़ा भारत की कामकाजी उम्र की आबादी (Working Age Population) में हुई वृद्धि से करीब दोगुना है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश में जितने नए लोग काम करने की उम्र में शामिल हो रहे हैं, उससे कहीं अधिक गति से नए रोजगार और कमाई के साधन पैदा हो रहे हैं।

आर्थिक असमानता में आई बड़ी कमी

रिपोर्ट में केवल गरीबी घटने की बात ही नहीं कही गई है, बल्कि समाज में अमीर और गरीब के बीच की खाई (आर्थिक असमानता) कम होने के आंकड़े भी सामने आए हैं। आर्थिक असमानता को मापने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पैमाने 'गिनी सूचकांक' (Gini Index) का जिक्र करते हुए बताया गया कि भारत का गिनी सूचकांक 20 प्रतिशत से अधिक घटकर 23.0 पर आ गया है। गिनी सूचकांक का नीचे आना इस बात का संकेत है कि देश की आर्थिक प्रगति का लाभ केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका फायदा समाज के निचले और मध्यम वर्ग तक भी पहुंचा है।

क्या कहती है विश्व बैंक की ‘अक्टूबर 2026’ रिपोर्ट?

विश्व बैंक की ’इंडिया पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ : अक्टूबर 2026’ नामक रिपोर्ट में भारत के इस बदलाव का पूरा ब्योरा दिया गया है:-

  • अत्यधिक गरीबी में कमी:- भारत में अत्यधिक गरीबी की दर 2011 के 27.1 प्रतिशत से घटकर 2023 में 2.6 प्रतिशत रह गई है।
  • गणना का आधार:- ये अनुमान अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार 2021 की क्रय शक्ति समता (PPP) पर आधारित हैं। इसमें निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए प्रतिदिन 4.20 अमेरिकी डॉलर और अत्यधिक गरीबी के लिए प्रतिदिन 3 अमेरिकी डॉलर की सीमा तय की गई है।
  • चौमुखी विकास:- विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से माना है कि पिछले एक दशक में भारत ने मौद्रिक (आय और खर्च) और गैर-मौद्रिक (स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी, आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं) दोनों ही मोर्चों पर गरीबी कम करने में ऐतिहासिक प्रगति की है।

विश्व बैंक की यह रिपोर्ट और प्रधानमंत्री मोदी का संदेश यह स्पष्ट करता है कि भारत अब एक नए आर्थिक युग में प्रवेश कर रहा है। कल्याणकारी योजनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास और पारदर्शी शासन के दम पर भारत ने गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में दुनिया के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। आने वाले समय में यह सुधार देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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