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सर्वशक्तिमान की तरह कार्य न करें DM- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजनौर जिलाधिकारी के आदेश को किया निलंबित

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने बिजनौर डीएम के आदेश को निरंकुश और अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण बताते हुए गोगा नवमी मेले के प्रबंधन पर उनके आदेश को निलंबित कर दिया है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) ने बिजनौर के फेफना गांव में आयोजित होने वाले पारंपरिक गोगा नवमी मेले के प्रबंधन से जुड़े एक मामले में बिजनौर के जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा पारित आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जिलाधिकारी निरंकुश होकर या जिले का 'सर्वशक्तिमान' अधिकारी समझकर काम नहीं कर सकते।

कोर्ट ने फैसले में क्या-क्या कहा?

अदालत ने कहा कि जिलाधिकारी का आदेश प्रथम दृष्टया उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर था और यह स्पष्ट रूप से दूसरे के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का मामला है। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को आवश्यक प्रशासनिक अनुमति लेकर बिजनौर जिले की चांदपुर तहसील के फेवना गांव में मेला आयोजित करने की भी अनुमति दी।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विवेक सरन की पीठ ने कहा, ’’इस अदालत ने कई बार जिलाधिकारियों को आगाह किया है कि वे स्वयं को जिले का ऐसा सर्वशक्तिमान अधिकारी न समझें, जो किसी भी तरह का आदेश पारित कर सकते हैं, भले ही संबंधित विषय किसी अन्य जिला स्तरीय अधिकारी या न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र में आता हो। प्रथम दृष्टया यह अधिकार क्षेत्र के अतिक्रमण का एक और मामला है।’’

क्या था मामला?

जिलाधिकारी ने 29 अगस्त 2025 को जारी आदेश में पारंपरिक मेले का प्रबंधन ग्राम सभा को सौंप दिया था और साथ ही मेले से होने वाली आय के प्रबंधन के लिए राजस्व अधिकारियों की तीन सदस्यीय समिति भी गठित की थी। प्रबंधन समिति ’सार्वजनिक आर्य इंटर कॉलेज’ और अन्य याचिकाकर्ताओं ने जिलाधिकारी के इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने पहले ग्राम सभा के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया था। इस दौरान कुछ विरोधी पक्षों ने मेला आयोजित करने के उनके अधिकार पर सवाल उठाए थे।

इस मुकदमे में भूखंड संख्या 981 और 997 पर मेला आयोजित करने के याचिकाकर्ताओं के अधिकार में हस्तक्षेप रोकने के लिए निषेधाज्ञा जारी करने का अनुरोध किया गया था। वर्ष 1982 में दायर मूल मुकदमे में द्वितीय अपर सिविल न्यायाधीश ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया था।

जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय

उच्च न्यायालय ने कहा कि जिलाधिकारी का आदेश दीवानी अदालत के उस फैसले के बिल्कुल विपरीत है, जो याचिकाकर्ताओं के पक्ष में और ग्राम सभा सहित अन्य पक्षों के विरुद्ध दिया गया था। इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर को सुनाए गए अपने फैसले में रिट याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने राज्य सरकार को अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को होगी।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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