बिहार की राजनीति में दो नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्यों (MLC) के भारतीय जनता पार्टी (BJP) को समर्थन देने के ऐलान के बाद विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दोनों MLC की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होना संविधान की दसवीं अनुसूची और दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का आधार बन सकता है। जिन दो MLC को लेकर विवाद हुआ है, उनमें बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज शामिल हैं। दोनों ने चुनाव जीतने के एक सप्ताह से भी कम समय बाद BJP में शामिल होने का ऐलान किया था। शनिवार देर रात तेजस्वी यादव ने इस मामले पर बयान जारी कर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग उठाई।
तेजस्वी बोले- संविधान का मजाक बना रही BJP
तेजस्वी यादव ने कहा कि दोनों सदस्य निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधान परिषद का चुनाव जीते थे, लेकिन अब उन्होंने औपचारिक रूप से BJP में शामिल होने की घोषणा की है। उनके मुताबिक, ऐसा करना संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी प्रावधानों को आकर्षित करता है। तेजस्वी ने संविधान के अनुच्छेद 191(2) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान के तहत दलबदल कानून के आधार पर अयोग्य ठहराए गए सदस्य राज्य विधानमंडल के सदस्य बने रहने के पात्र नहीं रहते। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ 6(1) के तहत विधान परिषद के सभापति को दलबदल के आधार पर सदस्यता खत्म करने के मामलों में फैसला लेने का अधिकार है। तेजस्वी ने BJP पर संविधान का मजाक बनाने का आरोप भी लगाया।
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BJP ने दी अलग सफाई
विवाद बढ़ने के बाद BJP की ओर से भी सफाई सामने आई। पार्टी प्रवक्ता कुंतल कृष्ण और विधायक मनोज शर्मा ने वीडियो जारी कर कहा कि दोनों निर्दलीय MLC ने BJP को अपना समर्थन दिया है। BJP नेताओं के मुताबिक, बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और JDU अध्यक्ष नीतीश कुमार के नेतृत्व में भरोसा जताते हुए पार्टी को समर्थन दे रहे हैं। पार्टी ने उनके कदम को औपचारिक रूप से BJP में शामिल होना नहीं, बल्कि समर्थन देना बताया।
किन सीटों से जीते थे दोनों MLC?
बंशीधर ब्रजवासी तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से और राहुल राज सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे। हाल ही में बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हुए द्विवार्षिक चुनाव में BJP और JDU ने चार-चार सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में BJP को दो सीटों पर जीत मिली, जबकि JDU केवल एक सीट जीत सकी। अब दोनों निर्दलीय MLC के समर्थन को लेकर उठे विवाद ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। फिलहाल इस मामले में सदस्यता रद्द करने की मांग पर अंतिम फैसला विधान परिषद के सभापति को लेना होगा।
