शहर

शेर शाह सूरी ने बनाई थी पटना की सबसे बड़ी मस्जिद, 480 साल बाद आज किस स्थिति में है?

रमजान के अंतिम दिनों में आजकल पटना में ईद की तैयारियां जोरों पर हैं। शहर में कई छोटी-बड़ी मस्जिदें हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शहर की सबसे बड़ी मस्जिद का नाम क्या है और इसे कब बनाया गया था। अफगान शैली में बनी यह मस्जिद शेर शाह सूरी ने बनवाई थी।

Image

पटना की सबसे बड़ी मस्जिद

रमजान का महीना खत्म होने को है और हर कोई ईद की तैयारियों में लगा हुआ है। ईद पर मस्जिद में खास नमाज होती है और फिर खुशी-खुशी लोगों को गले लगाकर यह पर्व मनाया जाता है। बिहार की राजधानी पटना में भी ईद की तैयारियां जोर-शोर से हो रही हैं। ईद के दिन तमाम लोग मस्जिद जाकर नमाज अदा करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पटना की सबसे बड़ी मस्जिद का नाम क्या है? यह कहां पर है? और इसके कब व किसने बनवाया था? चलिए जानते हैं -

पटना की सबसे बड़ी मस्जिद का नाम क्या है?

पटना की सबसे बड़ी मस्जिद का नाम शेर शाह सूरी मस्जिद है, जिसे शेर शाही भी कहते है। यह पटना की सबसे बड़ी, और एतिहासिक मस्जिद है। यह मस्जिद अपने अद्भुत अफगान स्टाइल आर्किटेक्चर के लिए खास पहचान रखती है। इसके अलावा इसका बड़ा सेंट्रल गुंबद और आसपास चार छोटे गुंबद इसे अनोखा बनाते हैं। यह मस्जिद पटना का एक प्रमुख लैंडमार्क है और इसके गुंबद इस तरह से बने हैं कि किसी भी ऐंगल से एक बार में सिर्फ तीन ही नजर आते हैं।

कब और किसने बनवाई शेर शाही मस्जिद

इस मस्जिद का निर्माण सूरी वंश के संस्थापक शेर शाह सूरी ने करवाया था। शेर शाह सूरी ने मुगल बादशाह हुमायूं को हराकर 1540-1545 तक उत्तर भारत पर राज किया था और यह मस्जिद भी उसी काल में बनी। शेर शाह सूरी और उसके अनुयायी यहां पर नमाज पढ़ सकें, इसलिए इस मस्जिद का निर्माण किया गया था। शेर शाह सूरी के दौर में यह मस्जिद धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र भी था।

तीन देशों के आर्किटेक्ट पर बनी मस्जिद

शेर शाही मस्जिद इंडो-इस्लामिक डिजाइन के कुछ पुट के साथ अफगान आर्किटेक्ट का अनोखा नमूना है। इस मस्जिद में फारसी, अफगान और भारतीय निर्माण कौशल के पुट दिखते हैं। मस्जिद को शुरुआत में लाल बलुआ पत्थरों से बनाया गया और बारीक काम भी किया गया। इसका मुख्य प्रार्थना कक्ष काफी बड़ा है और यहां बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा कर सकते हैं।

ऐतिहासिक लम्हों की मूक दर्शक रही है ये मस्जिद

जैसा कि हमने ऊपर बताया था, मस्जिद की एक बड़ी गुंबद है और उसके आसपास 4 छोटे गुंबद हैं। यहां बनी मीनारें लंबी और गोल हैं, जो इस मस्जिद को और भी अच्छा लुक देती हैं। इस मस्जिद ने पिछले लगभग 500 सालों में कई ऐतिहासिक क्षण देखे हैं और यह लगातार बदली सल्तनतों और सरकारों की मूक दर्शक रही है। यहां शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोग नमाज पढ़ने आते हैं।

आज इस मस्जिद की देखरेख और रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वे (ASI) करता है। ASI की तरफ से यहां समय-समय पर रिनोवेशन का काम किया जाता है। पटना के केंद्र में मौजूद इस मस्जिद तक पहुंचने के लिए बसें, ऑटो रिक्शा और टैक्सी भी आसानी से मिल जाती हैं। मस्जिद में एंट्री के लिए किसी तरह की फीस नहीं ली जाती है और यह दिनभर खुली रहती है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

और पढ़ें
End of Article