पटना

Bihar: पटना की मेट्रो टनल में मजदूरों पर चढ़ा लोको पिक-अप, दो की मौत; 6 घायल

Patna Metro Tunnel Accident: पटना में मेट्रो टनल में लोको पिक-अप का ब्रेक फेल हो गया, जिससे वह मजदूरों पर चढ़ गया। इस हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई है और 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

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पटना मेट्रो टनल में हादसा।

Photo : Twitter

Patna Metro Tunnel Accident: बिहार की राजधानी पटना में बड़ा हादसा हुआ है। एनआईटी मोड़ पर मेट्रो टनल में लोको पिक-अप का ब्रेक फेल हो गया, जिससे वह मजदूरों पर चढ़ गया। पटना एसएसपी ने बताया कि इस हादसे में दो की मौत हो गई है और 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पटना के जिलाधिकारी ने कहा है कि दो लोगों की मौत की सूचना है 6 लोग घायल हुए हैं सभी का इलाज चल रहा है।

बताया जा रहा है कि टनल के अंदर मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान लोको पिक-अप का ब्रेक फेल गया और वह नियंत्रण से बाहर हो गया। इसकी चपेट में कई मजदूर आ गए। हादसे के बाद पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर टनल से मजदूरों को बाहर निकाला। बताया जा रहा है कि एक मजदूर की मौत टनल के अंदर ही हो गई थी। अन्य घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

हादसे के समय टनल में थे 25 लोग

बताया जा रहा है कि जिस समय यह हादसा हुआ, टनल में करीब 25 मजदूर काम कर रहे थे। मजदूरों ने हादसे के समय टनल में किसी मेट्रो अधिकारी के न मौजूद होने का आरोप लगाते हुए हंगामा भी किया। बताया जा रहा है कि सामान ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले हाइड्रोलिक लोको का ब्रेक फेल होने के कारण यह हादसा हुआ।

मिट्टी धंसने का भी दावा

वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि यह हादसा टनल के अंदर मिट्टी धंसने के कारण हुआ। बताया जा रहा है कि रोज की तरह टनल में मजदूर काम कर रहे थे, अचानक मिट्टी गीली होने के कारण धंस गई, जिसकी चपेट में कई मजदूर आ गए। मजदूरों ने तीन लोगों की मौत होने का दावा किया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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