Tejashwi Vs Nitish Kumar, Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आज यानी शुक्रवार 14 नवंबर को घोषित हो रहे हैं। सुबह मतगणना शुरू होने के साथ ही NDA को तेजी से बढ़त मिलनी शुरू हुई और सत्तारूढ़ गठबंधन कुल 243 सीटों में से 200 के आंकड़े के पास तक पहुंच गया। इससे साफ है कि '25 से 30, फिर से नीतीश' और 'फिर से नीतीशे कुमार' जैसे नारे बिहार की जनता को भा गए। चुनाव के जो नतीजे सामने आ रहे हैं, उससे साफ है कि नीतीश कुमार ने अपनी सुशासन बाबू की छवि को न सिर्फ बरकरार रखा है, बल्कि उसे और भी उजला किया है।
बिहार में NDA के तीन प्रमुख घटक दल हैं। इनमें 101 सीटों पर चुनाव लड़ी भाजपा अकेले ही 87 सीटों पर जीत की ओर आगे बढ़ रही है, जबकि 101 सीटों पर चुनाव लड़ी नीतीश कुमार की पार्टी JDU भी 79 सीटों पर लगातार बढ़त बनाए हुए है। उधर चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 28 सीटों पर चुनाव लड़ा और 21 सीटों पर जीत की ओर आगे बढ़ रहे हैं। इस तरह से NDA अपने सभी सहयोगियों के साथ लगातार 190 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
इस चुनाव ने नीतीश को एक बार फिर बिहार का सबसे बड़ा नेता साबित कर दिया है। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि उनकी योजनाएं बिहार की युवाओं, बुजुर्गों, महिलाओं और हर वर्ग को पसंद आयी हैं। दूसरी तरफ महागठबंधन में आज मायूसी छायी हुई है।
महागठबंधन ने RJD नेता और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया। RJD ने 140 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन दोपहर 1.03 बजे तक उनकी पार्टी सिर्फ 31 सीटों पर बढ़त बना पायी है। उधर महागठबंधन में उनकी सहयोगी कांग्रेस पार्टी ने 60 सीटों पर चुनाव लड़ा और उसे महज 4 सीटों पर ही बढ़त हासिल है। वाम दलों को 6 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है। जबकि महागठबंधन की सरकार बनने पर उपमुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश किए गए मुकेश सहनी की पार्टी एक भी सीट जीतती हुई नहीं दिख रही है।
महागठबंधन की हार की समीक्षा करें तो साफ नजर आता है कि विपक्षी गठबंधन ने बिहार के मुद्दों पर चुनाव नहीं लड़ा। उन्होंने वोट चोरी के मुद्दे (जो कि बिहार में मुद्दा था ही नहीं) को कुछ ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। इसके अलावा तेजस्वी यादव ने हर घर से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने का वादा किया, लेकिन जनता को उनके इस दावे में कोई दम नजर नहीं आया।
उधर सत्तारूढ़ NDA गठबंधन ने तेजस्वी यादव के माता-पिता राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव के शासन काल को 'जंगलराज' की संज्ञा देकर जनता को वह समय फिर से याद दिलाया। सत्तारूढ़ गठबंधन का दिखाया जंगलराज का डर जनता के बीच काम कर गया, जबकि RJD जंगलराज के मुद्दे की काट नहीं ढूंढ़ पाई। इस तरह से नीतीश कुमार और NDA को बिहार में ऐतिहासिक बहुमत मिलता हुआ दिख रहा है, जबकि महागठबंधन अपनी ऐतिहासिक हार की तरफ आगे बढ़ रहा है।
