देश को अभी अपनी पहली बुलेट ट्रेन का बेसब्री से इंतजार है। अहमदाबाद और मुंबई के बीच बन रही देश की पहली बुलेट ट्रेन के अपडेट लगातार आते रहते हैं। अब खबर ये है कि बिहार भी बुलेट ट्रेन के रूट से जुड़ेगा। जी हैं, बिहार को बुलेट ट्रेन की रफ्तार मिलेगी, लेकिन यह अहमदाबाद-मुंबई रूट से नहीं बल्कि दिल्ली-वाराणसी-हावड़ा रूट से जुड़ेगा। नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHRCL) इस रूट को लेकर तैयारी कर रहा है और माना जा रहा है कि इसी साल इसके लिए DPR भी तैयार कर ली जाएगी।
बिहार में सिर्फ पटना ही नहीं, बल्कि पांच जिलों से बुलेट ट्रेन गुजरेगी। कहा जा रहा है कि इसके लिए बिहार में 260 किमी लंबा एलिवेटिड कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। इसमें अकेले पटना जिले में ही 60 किमी का एलिवेटिड ट्रैक बनेगा। NHRCL जल्द ही डीपीआर तैयार करने के लिए एक एजेंसी का चुनाव करेगा और माना जा रहा है कि इसी साल अगस्त तक डीपीआर तैयार भी हो जाएगी।
अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना के बाद केंद्र सरकार दिल्ली-वाराणसी-हावड़ा हाईस्पीड रेल कॉरिडोर पर काम करेगी। इसके तहत पहले चरण में वाराणसी से पटना होते हुए हावड़ा तक एलिवेटिड ट्रैक तैयार होगा। इसके दूसरे चरण में दिल्ली और वाराणसी को बुलेट ट्रेन से जोड़ा जाएगा। कहा जा रहा है कि पटना के फुलवारी शरीफ के पास हाईस्पीड बुलेट ट्रेन का स्टेशन बनाया जाएगा।
जैसा कि हमने ऊपर ही बताया पटना जिले में बुलेट ट्रेन का एलिवेटिड ट्रैक करीब 60 किमी का होगा। इसके तहत 58 गांवों की जमीन को चिन्हित किया गया है। अकेले पटना जिले में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 135.06 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी। एलिवेटिड ट्रैक बनाने के लिए प्रस्तावित मार्ग पर करीब 4 हजार पेड़ रोड़ा बन सकते हैं। इन्हें यहां से हटाने या उखाड़कर कहीं अन्य जगह पर लगाने के लिए वन विभाग से NOC भी लेना होगा। वन विभाग के अनुमति मिलने के बाद ही पटना में बुलेट ट्रेन का निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा।
रेलवे बोर्ड के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्रीय बजट में राशि आवंटित हो चुकी है। दावा है कि पांच साल के अंदर ही बिहार से गुजरने वाली बुलेट ट्रेन को चालू करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया गया है। एक बार इस हाईस्पीड कॉरिडोर का निर्माण कार्य पूरा हो गया तो यात्री वाराणसी से हावड़ा का सफर हवा पर सवार होकर कर पाएंगे। इससे यात्रियों का काफी समय बचेगा।
